Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Bhawna_thaker, lekh

चलो अब मुखर हो जाएँ

“चलो अब मुखर हो जाएँ” ये कैसे समाज में जी रहे है हम जब भी सोचते है हमारे आस-पास हो …


“चलो अब मुखर हो जाएँ”

चलो अब मुखर हो जाएँ

ये कैसे समाज में जी रहे है हम जब भी सोचते है हमारे आस-पास हो रही घटनाओं के बारे में तब आहत होते मन चित्कार कर उठता है। आख़िर कब तक? कहाँ जाकर रुकेगी ये दिल को झकझोरने वाली आँधियाँ। इंसानी दिमाग साज़िशो की फ़ैक्ट्री होता जा रहा है। एक दूसरे को गिराने में, लूटने में और रैगिंग करने में माहिर होते जा रहे है। इन सारी घटनाओं की कौनसी परिधि आख़री होगी। इस धुआँधार बहते मुसलसल अपराधों के किनारे तो होते होंगे की नहीं ? या वक्त की रेत पर चलते रहेंगे यूँही।

हम सब ये सोचते तो है पर मौन रहते है।तमाशबीनों का देश नूराकुश्ती करता रहेगा, दरिंदे आज़ाद घूमते रहेंगे मनमानी करते, अबलाओं को, मासूमों को रौंदते रहेंगे है। मंथर गति की न्यायिक प्रक्रिया फ़ैसला देने में मार खा रही है। फ़ैसला आने तक लोग गुनहगारों की शक्ल तक भूल जाते है, पर हम मौन रहते है ।
 
एक ओर शिक्षण बिक रहा है ढ़ाई साल के बच्चे को के.जी. में दाखिल करवाने के लाखों रुपये लगते है। आगे की शिक्षा की तो बात ही क्या करें, तदुपरांत इतनी फीस देने के बाद भी ट्यूशन अलग से। दंपत्ति दूसरे बच्चे को जन्म देने से डरते है की दो बच्चों का वहन कैसे संभव होगा।
पर हम मौन रहते है। हमें अपने काम से फ़ुर्सत ही नहीं की इन गंभीर मुद्दों के बारे में सोचें।
सियासत में माखौल के प्रयोग किए जा रहे है। एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ में सियासी स्तर तू-तू मैं-मैं की शतरंजी चाल चलते इतना गिर रहा है की आम इंसान हतप्रभ है। अपने ही चुने हुए बाशिंदे उन्हें नौच खा रहे है। किस पर विश्वास करें हर कोई कुर्सी प्रेमी है।
“हर क्षेत्र में नकारात्मकता हावी हो गई है” लोकतंत्र में जनादेश सर्वोपरि है, पर यहाँ कटुता और द्वेष की राजनीति के चलते कट्टरवाद ने स्थान ले लिया है। धर्मांधता ने सीमा लाँघकर दी है।
हम अब भी मौन रहेंगे?
 
“लकवाग्रस्त समाज लग रहा है” खोखले दावे और झूठे वचनों से भरमाते कुछ लोग अंधियारे कुएँ में कूद रहे है”
आज का युवा मानों उत्पीड़न का शिकार लग रहा है। हर मुद्दे से जुड़ तो रहा है पर राहबर के अभाव में शोर्टकट अपनाता खुद को भी नहीं पता किस ओर बढ़ रहा है। जेहादी खुद को स्थापित करने की होड़ में देश के दुश्मन हो रहे है। छोटे-छोटे बच्चों के दिमाग में ज़हर भर रहे है। एक वर्ग धरने की फ़िराक में चटाई बगल में लिए तैयार खड़ा रहता है। हर बात पर विद्रोह की लाठी विंझते देश की शांति भंग करने के में माहिर। अब तो विपक्षियों ने भी इस राह को अपनाते देश को तोड़ने की कसम खाई है।
अंधे, बहरे, गूँगे समाज का हिस्सा है हम सब। पारदर्शी समाज की आस में तो बैठे है, पर हिम्मत नहीं विद्रोह की शुरुआत कौन करने की। सबको अपनी ऊँगलियाँ बचानी है कौन आग में हाथ डालकर पोरें जलाना चाहेगा।
कब तक आँखों में नश्तर से चुभते द्रश्य देखने पडेंगे। बेटियों की बलि बहुत चढ़ा ली, भ्रष्टाचार के दीये में तेल बहुत सिंच लिया, बहुत सह लिया हर मुद्दों पर अत्याचार। ज़हरिली घटनाओं के मलबे से कौन निकालेगा उर्जा सभर झिलमिलाता सूर्य। कौन रक्त रंजित धरती को मुक्त कराएगा? संकीर्ण मानसिकता वाले दरिंदे घुटनों तक सन गए है। कुनमुनाती गंदी सोच में इस गहनतम पीड़ा सभर ये जो वक्त बह रहा उससे से निजात पाने को छटपटा तो रहा है हर मन।
 
कोई तो दहाड़ लगाओ, कोई तो सोए हुओं को जगाओ। अभी कितने दशक बिताने होंगे यूँही गुमसुम से देखते हुए जलते समाज को। चलो मिलकर खुद को मुखर कर लें एक जेहाद ये भी जगा ले अन्याय के ख़िलाफ़ मुहिम चलाकर देश को नई राह दिखाएं। कब तक होता है चलता है वाली सोच को सिमित रखकर सब सहते रहेंगे।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

भयानक ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन ?Who is responsible for the terrible train accident?

June 5, 2023

भयानक ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन ? परिजनों को रोते बिख़लते देख असहनीय वेदना का अनुभव सारे देश ने किया

44 वें विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2023 पर विशेष Special on 44th World Environment Day 5th June 2023

June 4, 2023

44 वें विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2023 पर विशेष आओ पर्यावरण की रक्षा कर धरती को स्वर्ग बनाएं –

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए राजद्रोह|Indian Penal Code Section 124A Sedition

June 4, 2023

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए राजद्रोह 22 वें विधि आयोग ने राजद्रोह पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी

डॉ. माध्वी बोरसे ने बेहतरीन शिक्षण तकनीकों के माध्यम से छात्रों के जीवन को आसान बना दिया।

June 4, 2023

डॉ. माध्वी बोरसे सिंह इंसा ने सबसे बेहतरीन शिक्षण तकनीकों के माध्यम से छात्रों के जीवन को आसान बना दिया।

पइसा दे दो पइसा-व्यंग्य | Paisa de do paisa-satire

June 2, 2023

 पइसा दे दो पइसा-व्यंग्य पइसा दे दो पइसा, हाहाहाहाहा- अरे-अरे आप ग़लत समझ रहे । ये कोई मुफ्त मे पैसे

विश्व माता पिता दिवस 1 जून 2023 |

June 2, 2023

सुनिए जी ! मम्मी पापा आप अपने बच्चों के लिए ख़ुदा से भी बढ़कर हो भारत में विश्व माता पिता

PreviousNext

Leave a Comment