Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

“घर एक मंदिर”

“घर एक मंदिर” घर एक महफ़ूज़ आशियाना होता है इंसान को सर छुपाने का। ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते थका-हारा …


“घर एक मंदिर”

"घर एक मंदिर"

घर एक महफ़ूज़ आशियाना होता है इंसान को सर छुपाने का। ज़िंदगी की जद्दोजहद से जूझते थका-हारा इंसान अपने सुकूनगाह में खुद को सुरक्षित महसूस करता है। किसी एक शहर के, किसी एक मौहल्ले में किसी एक गली में सलिके से सजाए हुए घर के दरवाज़े पर अपना नाम होना, और उस पते का आधार कार्ड से लेकर हर सरकारी डॉक्यूमेंट पर तैनात होना हर एक इंसान का सपना होता है।
घर की परिभाषा शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। दिनरथ पर दौड़ते शाम की आहट पर थका हारा इंसान जब घर का रुख़ करता है तब मन में सुकून को गले लगाने का ख़याल ही सुखद होता है।
घर की दहलीज़ पर कदम रखते ही होठों पर हंसी लिए घर की मालकिन, प्रिय पत्नी दरवाज़ा खोलते गले लगाती हो, घर के भीतर जाते ही दीवारें बाँहें फैलाए बुलाती हो, छत को तकते ही लगे की सर पर शामियाना सजा है, साथ में बच्चों की किलकारी और बुज़ुर्गो के आशीष की बारिश में नहाते सोफे पर पैर फैलाते बैठकर चाय पीते-पीते टीवी पर पसंदीदा प्रोग्राम देखने का अलौकिक सुख जिसे हासिल हो उस इंसान से सुखी दुनिया में और कोई नहीं।
चार दिवारी से बनें मकान को घर बनाता है परिवार का साथ, अपनापन, परवाह और एक दूसरे की फ़िक्र। जिस घर में क्लेश और झगड़े का वातावरण हो है वह घर, घर नहीं दोज़ख बन जाता है।
हम कहीं भी घूमने जाए भले 5 स्टार होटेल में वैकेशन मना कर आए हो पर घर आकर जब अपने बिस्तर पर चैन की नींद सोते है उस एहसास से सुकूनदेह कुछ नहीं। ख़ुशनसीब होते है वह लोग जिन्हें अपना घर नसीब होता है। इसलिए घर में हँसी-खुशी का वातावरण रखना चाहिए। जिस घर में शांति होती है, उस घर में लक्ष्मी और रिद्धि-सिद्धि का वास होता है। ऐसे घर को कहने का मन करता है घर एक मंदिर।
दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो फूटपाथ पर चद्दर बिछाकर सोते है, या घास-फूस और कच्ची मिट्टी से बनी झोंपड़ी में रहते है फिर भी कोई सुख सुविधा न होते हुए भी आराम से और प्यार से जीवन गुज़ार रहे होते है। घर छोटा हो या बड़ा ये मायने नहीं रखता जहाँ परिवार एक समय साथ बैठकर खाना खाता हो और जिस घर की खिड़की और दहलीज़ से परिवार के सदस्यों की हंसी की आवाज़ गूँजती हो वह अगर झोंपड़ी भी है तो आलिशान महल से कम नहीं होती। अपना घर जैसा भी हो अपना स्वर्ग होता है।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

विश्व हिंदी दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

 विश्व हिंदी दिवस  हिंदी की लोकप्रियता को लेकर समूचे विश्व में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

सम्मान का बोझ- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 सम्मान का बोझ  कहीं पढ़ा था की लड़कियों का आत्मसम्मान बढ़ाओ शादी की उम्र नहीं,सही बात हैं,लड़कियों को सम्मान मिलना

ली उबासी और निगली मक्खी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 ली उबासी और निगली मक्खी खूब चर्चा में हैं मुख्य मंत्री चन्नी का पराक्रम, कांड तो शायद कह सकते इसे।जो

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी

January 7, 2022

अपना हाथ जगगन्नाथ बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का

सब कुछ आर्टिफिशियल!!!-किशन सनमुखदास भावनानी

January 6, 2022

सब कुछ आर्टिफिशियल!!! वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में मानवीय बुद्धि सब कुछ आर्टिफिशियल बनाने के चक्कर में है!!! प्राकृतिक मौलिकता और

संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़-किशन सनमुखदास भावनानी

January 6, 2022

संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़!!! विश्व प्रसिद्ध सदियों पुरानीं भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था के मूल्यों को बनाए

Leave a Comment