Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

2 अक्टूबर 2022 महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष में उनके सिद्धांतों और विचारों पर मौलिक रचना कविता –गांधीजी के सिद्धांत …


2 अक्टूबर 2022 महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष में उनके सिद्धांतों और विचारों पर मौलिक रचना

कविता –गांधीजी के सिद्धांत व विचार

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

सत्य अहिंसा शांति धर्मनिरपेक्षता
धार्मिक बहुलवाद और अधिकारों के लिए
लड़ना सत्याग्रह का सहारा
गांधीजी के सिद्धांत थे

राजनीतिक नैतिकतावादी उपनिवेशवाद विरोधी
दूरदर्शी नेतृत्व अहिंसात्मक दृष्टिकोण
बाधाओं के खिलाफ एकजुटता
गांधीजी के विचार थे

गांधी जी का सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार
के लिए पांच बार नामांकन किया गया
ग्रेट ब्रिटेन ने मृत्यु के 21 साल बाद उनका सम्मान
डाक टिकट जारी किया जिनके खिलाफ लड़ाई किए थे

दो अक्टूबर महात्मा गांधी के विश्वासों आदर्शों
शिक्षाओं अहिंसात्मक दृष्टिकोण को
उत्सव के रूप में याद कर उनका पालन
करने का दिन है जो उनके स्वपन थे

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

Toot pada Aakash by vijay Lakshmi Pandey

September 23, 2021

 टूट  पड़ा आकाश …!!! बीती  रात सहसा टूट   पड़ा  आकाश । आलय  देवालय  सब एकाकार । अनवरत गर्जना  दामिनी  दमक

Thekedaro ka vikash by Jitendra Kabir

September 23, 2021

 ठेकेदारों का विकास छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर करता है प्रचार और समर्थन ‘दल विशेष’ का, बदले में पाता है

Talash zindagi ki by komal Mishra koyal

September 23, 2021

 तलाश ज़िंदगी की क्या कुसूर मेरा था,  बस अपने घर को छोड़ा था।  पूरे हो सके ख़्वाब इन आँखों के, 

Bhul jane ki takat rakhte hai by vijay Lakshmi Pandey

September 23, 2021

 भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!! हर लम्हा गुज़रता है मेरा , दर्द     के   आग़ोश   में । जख़्म 

Hamari raahen alag hai by Jitendra Kabir

September 23, 2021

 हमारी राहें अलग हैं अगर तुम चाहते हो, मैं न बोलूं गलत को ग़लत और सही को सही, बेजुबान बन

Pran priye kavya by salil saroj

September 22, 2021

 प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित  कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय  1

Leave a Comment