Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

भावनानी के भाव गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं  अपने इतने सालों की मौजमस्ती वाली सेवा जिसमे रोज़ …


भावनानी के भाव

गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं 

अपने इतने सालों की मौजमस्ती वाली
सेवा जिसमे रोज़ रात पार्टी लिया हूं
तारीख़ को रिटायर हो रहा हूं
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

साथियों एजेंटों बिचौलियों से कह दिया हूं
मलाई वाली फाइलों को तारीख पहले बुलवाया हूं
तारीख को रिटायर हो रहा हूं
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

आगे जिंदगी का क्या होगा सोच रहा हूं
पेंशन से काम नहीं चलेगा चिंतत हो रहा हूं
एशोआरम अय्याशी का आदि रहा हूं
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

अभी मैं घर वालों सहित ठसन से जी रहा हूं
परिवार को सभी सुख सुविधाएं दे रहा हूं
मलाई बंदी से क्या होगा सोच रहा हूं
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

मलाई बिना पेंशन से कैसे जिऊंगा सोच रहा हूं
ठसन सहित रुतबा छिनेगा घबरा रहा हूं
हरे गुलाबी के बल पर विकारों का आदि रहा हूं
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

Related Posts

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था

March 6, 2023

 विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था  एशिया आर्थिक संवाद के सातवें संस्करण 23-25 फ़रवरी 2023 में दिखा भारत

अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी

March 6, 2023

डर अच्छा लगता है अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी बुलडोज़र, इनकाउंटर, त्वरित एक्शन के डर ने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment