Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े …


खुशियां दिखावे की

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं

यह खुशियां है दिखावे की
यह जमाना है बड़े जालिम
किसी का ना मर्म समझता है
मतलबी है यहां इंसान
किसी का नज्म टटोलता है
शरीफों में है जो शामिल
गिरगिट सा रंग बदलता है
मुखौटा सरलता का पहनकर
वह जालिम रंग बदलता है
सादगी जो दिखाते दिन के
उजालों में वही रातों में
देखो वही कैसे डसते हैं
यह दोस्ती है क्या चीज
यह भी है दिखावे की
जो घायल है पड़ा यहां
मतलब की मरहम लगाते हैं
ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं
यह खुशियां हैं दिखावे की
यह खुशियां है दिखावे की

डॉ इंदु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment