Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

खुद को खुद पढ़ जाती| khud ko khud padh pati

खुद को खुद पढ़ जाती अपनी ही जिंदगी के किस्से मैं सुनाऊं किसकोकोई अपना नहीं मेरा , अपना कह सकूं …


खुद को खुद पढ़ जाती

अपनी ही जिंदगी के किस्से मैं सुनाऊं किसको
कोई अपना नहीं मेरा , अपना कह सकूं जिसको।।

मेरा अपना , अपना होकर भी अपना ना हो सका
अपने टूटे सपनों के टुकड़े मैं अब दिखाऊं किसको।।

मेरी बिखरी अरमानों कि सेज देख दर्द होता है
फर्क नहीं पड़ता उसे सेज सजी मैं दिखाऊं जिसको।।

मेरी ख्वाहिशों को दिल में दबा कर मारा मैंने
मेरा अपना ही क़ातिल मेरी ख्वाहिशों का बताऊं किसको।।

आंखें आज भी उसकी ही यादों मैं मेरी आंसू बहाई
कोई तो हो जिसे दर्द ए स्याही के शब्द पढ़ाऊं जिसको।।

खुद को ही शब्दों में सजा खुद का दर्द पढ़ जाती हूं
जख़्मी दिल पर लिख मरहम़ लगाती
मैं ये दिखाऊं किसको।।

ये तंहाई जिंदगी की अंधेरों में मुझे ले जाती है
कोई तो हमदर्द हो मेरा भी , अपना कह सकूं जिसको।।2।।

About author 

Veena adwani
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र


Related Posts

सफर – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं

प्रेम हमेशा रहेगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 23, 2021

 प्रेम हमेशा रहेगा मजबूरियां सांसारिक हैं हमारीख़त्म हो जाएंगी देह के साथ ही,लेकिन प्रेम अमर है आत्मा की तरहरहेगा तब

कोशिश- अनीता शर्मा

November 23, 2021

 “कोशिश” कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हिम्मत से आगे बढ़ कर प्रयत्न करते जाना है। मन में

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

November 23, 2021

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत

जीवन रूपी चाय-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 23, 2021

जीवन रूपी चाय! बचपन हमारा, सफेद दूध जैसा, जिंदगी ने लगाया, उबाल यह कैसा, कोई ना, जिंदगी को एक स्वादिष्ट

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

November 22, 2021

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी

Leave a Comment