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क्यूँ हमारा देश सफ़ाई के मामले में विदेशों के मुकाबले पीछे है

 “क्यूँ हमारा देश सफ़ाई के मामले में विदेशों के मुकाबले पीछे है” सफ़ाई के मामले में हमारा देश विदेश की …


 “क्यूँ हमारा देश सफ़ाई के मामले में विदेशों के मुकाबले पीछे है”

क्यूँ हमारा देश सफ़ाई के मामले में विदेशों के मुकाबले पीछे है

सफ़ाई के मामले में हमारा देश विदेश की तरह चकाचक और साफ़ सुथरा क्यूँ नहीं है? जहाँ भी देखें कचरे के ढ़ेर, पान, मसाला और गुटखा खाकर थूँक की लगाई पिचकारियाँ और रास्ते पर आवारा कुत्ते और गाय भेंसों का अड्डा दिखता है। किसीको अपने आस-पास का वातावरण और जगह को साफ़ सुथरा रखने की परवाह ही नहीं, न देश के प्रति अपना योगदान देना चाहते है। 

पशु पालक अपनी गाय भेंसों को रास्ते पर खुल्ला छोड़ देते है मुख़्य मार्गों पर गोबर पड़ा होता है। तो कभी दो बैल आपस में लड़कर राह चलते लोगों को घायल करते है, या एक्सिडेंट का कारण बनते है। इन लोगों के लिए कोई तो नियम हो, कोई तो कानून हो। 

अगर गंदगी और अव्यवस्था के लिए कोई पुरस्कार दिया जाता, तो वो बेशक भारत को ही मिलता। हमारे देश में यह मान्यता है कि सफ़ाई रोजमर्रा की चीज नहीं है। त्योहारों पर या कोई खास अवसर पर घर, दुकान और किसी भी जगह की सफ़ाई होती है। जैसे सफ़ाई विशेष अवसरों की चीज है। वर्ण व्यवस्था में साफ-सफाई का काम वर्ण विशेष पर छोड़ दिया गया था इसलिए लोगों के मन में यह बैठा हुआ है कि यह काम उनका नहीं है। स्टेट भी इस स्तर पर दखल दे सकता था पर उसका रिकॉर्ड खुद बहुत खराब रहा है। इस काम के लिए बनी सारी संस्थाएं दिखावा बनकर रह गई है। लोगों को लगता है यह मुद्दा पर्शनल नहीं है, इसलिए किसीने सरकारी तंत्र पर कभी दबाव भी नहीं ड़ाला।

स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ़ शहरों के मुख्य इलाकों में दिखता है। “बाकी हर गली मोहल्ले में प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें और कुड़े कचरों का ढ़ेर दिखता है”। क्यूँ हम अपने देश के प्रति इतने गैरजिम्मेदार है? बिना हिचकिचाहट के बिंदास यहाँ-वहाँ कचरा फेंक देते है। पार्क, रिसोर्ट या समुन्दर किनारे पिकनिक पर जाते है; तो थैलियाँ बोतलें और खाने-पीने के रैपर्स कहीं भी फैंक देते है। और यह समस्या किसी एक दो शहर की नहीं, पूरे देश का यही हाल है।

हाईवे पर छोटी-मोटी होटलों के बाहर कूड़े का ढ़ेर लगा होता है। क्यूँ म्युनिसिपल कार्पोरेशन वाले हर जगह पर बड़े डस्टबिन नहीं रखते? यहाँ-वहाँ कचरा ड़ालने वालों के ख़िलाफ़ कानूनी कारवाही या दंड की जोगवाई होनी चाहिए। 

न रोड़ रास्तों का मेंटानेन्स ठीक से होता है। एक बारिश आई नहीं की सड़के दम तोड़ने लगती है। हर जगह गड्ढे दिखते है। इन सारे कामों के लिए करोड़ों रुपयों की सरकारी ग्रांट मंजूर होती है। पैसे न जानें कहाँ जाते है, कोई पूछने वाला नहीं। 

एयरपोर्ट, रेल्वे स्टेशन, बस स्टेशन हर जगह पर गंदगी और पान की पिचकारियाँ देखकर मन आहत भी हो जाता है; और सेंसलैस लोगों पर गुस्सा भी आता है। अपनी ही संपत्ति को नुकसान पहुंचा कर गंदा करते है।

ऐसे लोगों पर नज़र रखकर कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

जनता को अपना देश साफ़ रखने के लिए स्वैच्छिक अभियान चलाना चाहिए। हर इंसान को अपना फ़र्ज़ समझते देश को साफ़ सुथरा रखना चाहिए। बच्चों में भी आदत ड़ालनी चाहिए की, जैसे अपने घरों में हम गंदगी नहीं फैलाते उसी तरह यह देश भी हमारा अपना है। बाहर से आए लोग हर जगह गंदगी देखकर क्या सोचेंगे हमारी आदतों के बारे में। 

क्या हम अपने घर में यहाँ-वहाँ थूँकते है, या कचरा ड़ालते है? नहीं न। तो क्या देश हम सबका नहीं, इसको गंदा करते वक्त क्यूँ हम सोचते नहीं?

आस-पास का वातावरण साफ़ रहेगा तो बिमारियों भी दूर रहेगी। प्रदूषण कम होगा और हवा-पानी और ऑक्सीजन शुद्ध मिलेगा। सफ़ाई रखने में कोई बड़ी बात तो नहीं। हर जगह पर डस्टबिन और पिकदानी रखी जाए, और देश को साफ़ सुथरा रखने में हर देशवासियों को अपना योगदान देते कंपलसरी सभी नियमों का पालन करना चाहिए। अगर जन-जन ये अभियान चलाएँ तो हमारा देश भी विदेशों की तरह साफ़-सुथरा और चकचकित दिखेगा। सभी देशवासियों से निवेदन है अपने देश के प्रति अपना फ़र्ज़ समझकर स्वैच्छिक स्वच्छता अभियान चलाएँ और अपने आसपास का वातावरण साफ़ रखिए।

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(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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