Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Astha Dixit, poem

कॉकरोच/cockroach

शीर्षक – कॉकरोच(cockroach) डियर कोकरोच, तुम इतना क्यों सताते हो ? मालिकाना हक है क्या तुम्हारा ? जो इतराते हो? …


शीर्षक – कॉकरोच(cockroach)

कॉकरोच/cockroach
डियर कोकरोच, तुम इतना क्यों सताते हो ?

मालिकाना हक है क्या तुम्हारा ? जो इतराते हो?
बताओ कब जाओगे वापस, हम अभी ….

आवारो के जैसे, बस पूरे घर में घूमते हो ।
पता नही क्यों, हर चीज टटोलते हो ।
क्या मिलता है उससे, तसल्ली या सुकून?
क्या तुम्हारी जाति का, यहीं है कानून ?
हमारा सुकून छीन के,तुम्हे क्या मिलता है।
खो जाओ तुम रास्ते में, क्या ऐसा हो सकता है ?
कितना सफाई करें, कितना छिड़के लाल हिट।
खा जाते मिठाई मेरी, बिना करे खिट पिट।
बताओ कब जाओगे वापस, हम अभी ….

काले काले एंटीना निकाले, सीना तान निकलते है ।
ऐसा लगता है डीएम है कहीं के, जब झुंड में चलते है।
किताबें, कपड़े, मिठाईयां खा ली, अब शरीर ही बचा है।
वापस करो सुख चैन हमारा, ये सब हमारे लिए सजा है।
कभी पर्दे में लटकते, ट्रॉली बैग के अंदर घुस जाते हो।
छाता खोलो तो उसमे भी, इक दो मिल ही जाते हो ।
कभी तो रास्ता भूलो घर, बस इतनी दया खाओ।
जाओ काम धंधा करो, और अपना घर बसाओ।
बताओ कब जाओगे वापस, हम अभी…..

About author 

आस्था दीक्षित कानपुर उत्तर प्रदेश
– आस्था दीक्षित
कानपुर उत्तर प्रदेश

Related Posts

हम सभी एक समान-डॉ. माध्वी बोरसे

December 10, 2021

हम सभी एक समान! जाति, धर्म से क्यों करते हैं भेदभाव,क्यों नहीं इंसानियत को आजमाओ? हम सभी का रक्त का

आंसू छलके- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

आंसू छलके आंसू भरकर स्वागत करना, बहुत पुरानी परंपरा अपनी,इंतजार लंबी जब होती है ,मन के आंसू छलक आते हैं,।।

राजनीति होनी चाहिए- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 10, 2021

 राजनीति होनी चाहिए राजनीति होनी चाहिए लोगों के बीच आपसी भाईचारा,प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाने के लिए,मगर अफसोसराजनीति होती हैउनके बीच

झंडा दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

December 10, 2021

झंडा दिवस आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस है सात दिसंबर उन्नीस सौ उनचास कोये मनाया गया था पहली बारतब से

गीत हमारे- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 10, 2021

गीत हमारे कुछ गीत ऐसे दर्द भरे,गाकर सुना सकता नहीं, पहले मेरे अश्क बहते,दर्द छुपा पाता नहीं ।। दृश्य ऐसे

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

December 10, 2021

आधे अधूरे अरमान अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत इश्क की भी तो थी चाहत गहरी चाहतों में घीरी

Leave a Comment