Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

कुर्सी का चक्कर है प्यारे .- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

कुर्सी का चक्कर है प्यारे …!!! गढ़नें वाले गढ़ते रहे विपक्ष -पक्ष की बातें ।कितनें पीछे छूट गए ना लिखी …


कुर्सी का चक्कर है प्यारे …!!!

कुर्सी का चक्कर है प्यारे .- विजय लक्ष्मी पाण्डेय
गढ़नें वाले गढ़ते रहे विपक्ष -पक्ष की बातें ।
कितनें पीछे छूट गए ना लिखी गईं वो रातें।।

जब-जब कोई वक्ता नेता खड़ा मंच पर बकता है।
मेरे नस-नस का जमा खूनअकुलाअकुला कर बहता है।।

रोज शाम जिन पन्नों पर नारी की मर्यादा बिकतीं।
रोज सुबह सिरहनें जिसके दो बोतल दारु की मिलती।।

एक्स- वाई -जेड नेता हो या कोई खद्दरधारी ।
बेटी -रोटी बन्द करो , ये कैसी नीति तुम्हारी।।

काम करो अपनें -अपनें ये जनता नहीं अनाड़ी।
एक -एक सबको दीखता है देश की खातिरदारी।।

कुर्सी का चक्कर है प्यारे काम गिनाओ अपनें ।
क्यों.??दिखलाते जनता को तुम सब्ज़ बाग़ के सपनें।।

बेटी रोटी बन्द करो इससे हटकर कुछ बोलो।
और लिखो इतिहास जीत का अपना भी मुँह धो लो।।

“विजय”मिलेगी खोल के बाहें खुद को खुद से तौलो।
नाम नहीं गिनवाने मुझको देश के साथ तो हो लो।।✍️

विजय लक्ष्मी पाण्डेय
एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
स्वरचित मौलिक रचना
आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

धारा के विपरीत

June 24, 2022

 धारा के विपरीत जितेन्द्र ‘कबीर’ शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी

अस्तित्व इतिहास बनेगी

June 24, 2022

 अस्तित्व इतिहास बनेगी सुधीर श्रीवास्तव पृथ्वी दिवस की औपचारिकता न निभाइए भू संरक्षण करना है तो  धरातल पर कुछ करके

यही जीवन चक्र है

June 24, 2022

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन

व्यंग्य धरती को मरने दो

June 24, 2022

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत

जब तक है जिंदगी

June 24, 2022

 जब तक है जिंदगी सुधीर श्रीवास्तव जिंदगी जब तक है गतिमान रहती है, न ठहरती है,न विश्राम करती है। सुख

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

PreviousNext

Leave a Comment