Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम!

 किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम! सफलता किसी के दम पर जीती नहीं जाती, पर कुछ लोगों …


 किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम!

किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम!

सफलता किसी के दम पर जीती नहीं जाती,

पर कुछ लोगों को यह बात समझ नहीं आती!

किसी की सफलता को देखने से पहले, उनकी मेहनत को देखें,

अगर प्रशंसा ना हो, तो किसी को गलत तरीके से ना परखे!

क्यों ऐसा लगता है अब भी आपको की किसी सफलता के पीछे, उसका नहीं सिर्फ किसी और का हाथ होता है,

मेहनत भी कुछ होती है, जिसमें एक इंसान, बहुत कुछ पाता और खोता है,

ना करो किसी की सराहना, अगर आपको प्रसन्नता नहीं है,

पर जान लो कोई भी सफल व्यक्ति की किसी पर निर्भरता नहीं हे!

आपने देखे होंगे चापलूसी करने वालों को,

आपने देखा होगा निर्भरता पर रहने वालों को,

पर अब देखने की यह भी कोशिश करिए,

सफलता पर खून पसीने बहाने वालों को!

अगली बार से किसी की सफलता को निर्भरता का नाम ना देना,

उसकी मेहनत को, आराम ना कहना,

बिना उस व्यक्ति की कहानी जाने, कोई प्रमाण ना देना,

नहीं सराहना होती आपसे, तो किसी और की उसे पहचान ना देना!

पहचान बनाने में जिंदगी लग जाती है,

बहुत सी पाबंदियों को तोड़कर आजादी ली जाती है,

इतना आसान नहीं है जिंदगी के हर मोड़ पर, बढ़ते चले जाना,

कभी-कभी कुछ लक्ष्य तक पहुंचने के लिए, जान भी चली जाती है!

और कुछ लोगो को यह बात समझ नहीं आएगी,

घृणा करने में ही उनकी सारी जिंदगी निकल जाएगी,

किसी की प्रसन्नता और सफलता उन्हें कभी नहीं खुश कर पाएगी,

पर मेहनती व्यक्ति, तू रुक ना ना, इन सब को पार कर के चलते जाना ही, तेरी पहचान बनाएगी!

हां तेरा संघर्ष, मेहनत, और तेरा चलता चले जाना ही तेरी पहचान बनाएगी!!

डॉ. माध्वी बोरसे!

(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

मां आज भी याद है

June 24, 2022

 मां आज भी याद है मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” प्यार  -फटकार अम्मी का लाड-प्यार पापा की डाट-फटकार आज भी याद आती

गजल

June 24, 2022

 गजल मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” म्हारे वतन मे अमन-चैन बण्यो रैवै । आ प्रार्थना जणो-जणो करतो रैवै ।। घर – घर

बन्दा नवाज

June 24, 2022

 बन्दा नवाज        मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” हर जर्रा – जर्रा उसका ही मोहताज है । हर जर्रे –

बलात्कार

June 24, 2022

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी

पृथ्वी दिवस

June 24, 2022

 पृथ्वी दिवस डॉ. इन्दु कुमारी  वसुंधरा को आइए  पेड़ों से सजाइए  वन बागों से इस धरा पर  जीवन की फसलें

प्रकृति के आंचल

June 24, 2022

 प्रकृति के आंचल डॉ. इन्दु कुमारी  प्रकृति हमारी हम प्रकृति के  सजाएंगे हम तो पाएंगे हम  लगाएंगे हम खाएंगे हम 

PreviousNext

Leave a Comment