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काशी-तमिल संगमम् यज्ञ की पूर्णाहुति

काशी-तमिल संगमम् यज्ञ की पूर्णाहुति भारत अनेक संस्कृतियों कलाओं भाषाओं बोलियों का देश है, लेकिन इसकी आत्मा एक है भारत …


काशी-तमिल संगमम् यज्ञ की पूर्णाहुति

काशी-तमिल संगमम् यज्ञ की पूर्णाहुति
भारत अनेक संस्कृतियों कलाओं भाषाओं बोलियों का देश है, लेकिन इसकी आत्मा एक है

भारत की विभिन्न संस्कृतियों के बीच संगमम् रूपी मंत्र से सेतु बनाकर नज़दीकियां लाना एक और एक ग्यारह ताक़त के बराबर – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत दुनिया में एक ऐसा अकेला देश है, जिसमें विभिन्न राज्यों की अनेक संस्कृतियों कलाएं भाषाएं और बोलियां अलग अलग है, जो अपनी परंपराओं और पूर्वजों की मान्यताओं पर आधारित है। परंतु सभी की आत्मा एक है, इसी खूबसूरती का नाम भारत है, जहां अनेकता में एकता, एक भारत श्रेष्ठ भारत को देखकर विश्व हैरान अचंभित है कि, हमारे यहां एक परिवार भी ठीक से संयुक्त रखने में वैचारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जबकि भारत में हजारों लाखों बोलियों भाषाओं संस्कृति के अनेकों राज्यों को मिलाकर भारत एक है की थीम पर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता हुआ आज उस मुकाम से कुछ ही कदम दूर खड़ा है, जिसे विश्व गुरु या विश्व का बादशाह की संज्ञा दी जा सकती है। चूंकि 19 नवंबर 2022 से लगातार एक माह तक चले काशी-तमिल समागम् रूपी यज्ञ की 16 दिसंबर 2022 को पूर्णाहुति हुई, या यूं कहें कि अनेकता में एकता वाली भारतीय संस्कृति बोलियों भाषाओं कलाओं के संगमम् की जोरदार शुरुआत हुई है। इसलिए आज हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपलब्ध जानकारियों के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत की विभिन्न संस्कृतियों के बीच समागम् रूपी मंत्र से सेतु बनाकर नज़दीकियां लाना एक और एक ग्यारह के बराबर ताकत लाना है।
साथियों बात अगर हम हजारों वर्ष पूर्व के भारत की करें तो हमारी संस्कृति कलाएं भाषाएं बोलियां ज़रूर अलग-अलग हैं परंतु सभी की आत्माएं होकर अखंड स्वर्ण भारत का दर्जा प्राप्त थी, जिसपर अंग्रेजों की बुरी नजर पड़ी और हम गुलामी के साए में जकड़कर सैकड़ों वर्ष गुजारे जिससे हमारे भावों में कुछ कड़वाहट घोलने की कोशिश की गई, जिसे कट्टरता की ओर लेजाकर दो खंडों में बांटा गया, फ़िर आजादी के बाद अनुमानतः पहली बार दो शिखर संस्कृतियों कलाओं भाषाओं बोलियों का संगमाम् काशी तमिल संगमम् के रूप में एक माह तक चला जिसका उद्घाटन माननीय पीएम महोदय ने 19 नवंबर 2022 को किया था और उसका समापन आज माननीय केंद्रीय गृह मंत्री सहित अनेक माननीयों द्वारा किया गया, जिसे हम समापन नहीं समाज के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखेंगे जो, हम सब एक हैं, इस जड़ को अधिक मज़बूती प्रदान करने में कामयाब सिद्ध होंगे।
साथियों बात अगर हम काशी-तमिल संगमम् के समापन समारोह की करें तो माननीय गृह मंत्री ने कहा,आज एक प्रकार से माननीय पीएम की काशी-तमिल संगमम् की कल्पना की पूर्णाहुति होने जा रही है, लेकिन ये पूर्णाहुति नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति के दो शिखरों, यानी, तमिलनाडु की संस्कृति, दर्शन, भाषा, ज्ञान और पूरी दुनिया में मान्यताप्राप्त काशी नगरी के सांस्कृतिक मिलन की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था, एक गुलामी के लंबे कालखंड ने हमारी सांस्कृतिक एकता, विरासत की विविधता और अलग-अलग संस्कृतियों में भारतीयता की एकरूपता को कुछ हद तक मलिन किया था, जिसे पुनर्जागरण की ज़रूरत थी। श्री शाह ने कहा कि काशी तमिल संगमम का आयोजन कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में भारत की सांस्कृतिक एकता के पुनर्जागरण का एक उत्तम प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद एक समय ऐसा आया जब भारत की संस्कृतिक एकता में जहर घोलने का काम किया गया,कई प्रकार के अलग-अलग विचारों के माध्यम से एक ही देश के दो समाजों को विमुख करने का प्रयास किया गया। श्री शाह ने कहा कि अब एक भारत, श्रेष्ठ भारत की रचना करने का समय आ गया है और वो भारत की सांस्कृतिक एकता से ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने भारत की संस्कृति के दो शिखरों के बीच सेतु बनाकर कई दूरियों को समाप्त करने का काम किया है और यहीं से भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरूआत होने वाली है।
साथियों इस कार्यक्रम के माध्यम से तमिलनाडु की कई कलाओं को काशी में मंच मिला है। उन्होंने कहा कि काशी – तमिल संगमम, आध्यात्मिक,सांस्कृतिक,वास्तुकला, साहित्य, व्यापार, शिक्षा,कला नृत्य, संगीत और भाषाओं के आदान-प्रदान का एक अद्भुत मंच बना है। भारत अनेक संस्कृतियों, भाषाओं, बोलियों और कलाओं का देश है, लेकिन इसकी आत्मा एक है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में सारे देश जियोपॉलिटिकल कारणों से बने हैं, लेकिन भारत एकमात्र जियोकल्चरल, सांस्कृतिक और संस्कृति के आधार पर बना हुआ देश है। उन्होंने कि भारत एक भू-सांस्कृतिक देश है और हमारी एकात्मता का आधार हमारी संस्कृतियाँ हैं, पीएम ने काशी तमिल संगमम के माध्यम से सदियों के बाद इन संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य किया है, जो कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा पीएम ने नई शिक्षा नीति में भाषा व संस्कृति के माध्यम से देश के आध्यात्मिक गौरव और ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा के ज़रिए भारत के छात्रों द्वारा विश्व पटल पर अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्था की है। हमारी अपनी भाषाएं और उनका गौरव इस नई शिक्षा नीति की आत्मा हैं, इसीलिए पीएम ने नई शिक्षा नीति में आग्रह से कहा कि शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए। मंत्री महोदय नें तमिलनाडु सरकार से अनुरोध किया कि राज्य में मेडिकल, टेक्निकल और कानून की शिक्षा तमिल भाषा में सुनिश्चित करें, जिससे तमिल को और अधिक मज़बूती मिले। शिक्षा मंत्री ने कहा, इस आयोजन के जरिए दो संस्कृतियों का मिलन हुआ। इस संगमम में काशी और तमिल का जुड़ाव तो हुआ ही साथ ही काशी और तमिलवासियों को बहुत कुछ सीखने का अवसर भी मिला। इससे काशीवासियों को तमिल भाषा, साहित्य एवं संस्कृति को आत्मसात करने का अवसर ​भी मिला है।श्री प्रधान ने कहा कि काशी तमिल संगमम की सफलता इसी से परिलक्षित होती है कि बीएचयू के ऐतिहासिक परिसर में दो लाख से अधिक लोग पहुंचे। वहीं लाखों लोग डिजिटल माध्यम से जुड़े रहे। कार्यक्रम में तमिलनाडु और काशी के 1500 से अधिक कलाकार, 300 से अधिक विशिष्ट अतिथि, 75 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हुए। दुनिया भर के देशों के अस्तित्व की रचना का अभ्यास करने वाले पंडित कहते हैं कि भारत एकमात्र देश है जो संस्कृति के आधार पर बना देश है। हमारे देश की एकात्मकता का आधार हमारी संस्‍कृतियां हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंतो हम पाएंगे कि काशी-तमिल संगमम् यज्ञ की आज पूर्णाहुति हुई। भारत अनेक संस्कृतियों कलाओं भाषाओं बोलियों का देश है लेकिन इसकी आत्मा एक है। भारत की विभिन्न संस्कृतियों के बीच संगमम् रूपी मंत्र से सेतु बनाकर नज़दीकियां लाना एक और एक ग्यारह ताकत के बराबर है।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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