Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Nandini_laheja, poem

कविता: शब्द | kavita: shabd

कविता: शब्द मन के अनगिनत विचारों को,सबके सन्मुख दे खोल।कहलाते है शब्द वही,या कहते इन्हें हम बोल।शब्द होते दर्पण व्यक्तित्व …


कविता: शब्द

मन के अनगिनत विचारों को,
सबके सन्मुख दे खोल।
कहलाते है शब्द वही,
या कहते इन्हें हम बोल।
शब्द होते दर्पण व्यक्तित्व के,
शब्द से होती मानव की पहचान।
शब्द जोड़ते अनेकों नाते आपस के,
शब्दों से ही तो पाते हम मान-अपमान।
तभी तो कहते सभी यही कि,
शब्दों में रखो सदा मिठास।
कटु शब्द लगते तीर से,
लाते रिश्तों में खटास।
अब यह हम पर करता है निर्भर ,
कैसे शब्दों का चुनाव करें।
सुनकर ना ह्रदय दुखे किसी का,
पर अपनत्व का भाव प्रवाहित करे।

About author 

 

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

Related Posts

मंगल हो नववर्ष| navvarsh par kavita

December 30, 2022

मंगल हो नववर्ष मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार। नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।। बाँट

तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ| Tumse ab mai kya chupaun

December 30, 2022

 तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ , सोचता हूँ यह भी मैं। किस्सा खत्म ही यह

मनोविकार | manovikar

December 29, 2022

 मनोविकार उठता जब शत्रु मनोविकार फ़ैल भयंकर दावानल-सा।  काम, क्रोध, लोभ, मोह से संचित पुण्यों को झुलसा। मन से उपजा

ईश्वर का उपहार है जीवन| ishwar ka uphar hai Jeevan

December 29, 2022

ईश्वर का उपहार है जीवन ईश्वर का उपहार है जीवन। ऐसे कर्म जीवन में करें।। याद करें हमको जमाना। ऐसे

एक तू ही है जिसको | ek tu hai jisko

December 28, 2022

 एक तू ही है जिसको एक तू ही है जिसको—————-।वरना हो गई मुझे तो नफरत,इन चमकते शीशों से,गोरे इन चेहरों

नये पलों की तलाश करो | naye palon ki talash karo

December 26, 2022

नये पलों की तलाश करो नये साल की नयी बेला परकुछ प्यारा सा नया काम करो नये साल की नयी

PreviousNext

Leave a Comment