Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

कविता-वो पंछियों के घरौंदे

वो पंछियों के घरौंदे आज भी उसी पेड़ की शाख पर वही पंछियों के घरौंदे हम पाए थे।।जो कभी हमनें …


वो पंछियों के घरौंदे

वीना आडवाणी तन्वी नागपुर , महाराष्ट्र

आज भी उसी पेड़ की शाख पर
वही पंछियों के घरौंदे हम पाए थे।।
जो कभी हमनें मिल तूफानों से बचाए थे
बचपन कि वो दोस्ती नादानियों संग
मिल हम तुम अटखेली कर निभाए थे।।
याद है कितनी बार हम पेड़ कि शाख
पर झूले बांध एक दूजे को झुलाए थे।।
ना जाने कितनी बार हम दोस्ती नहीं
तोड़ेगे यही तो यही बैठ कसमें खाए थे।।
तुम जब कभी गिरे हम आगे बढ़ तुम्हें
कांधे का सहारा देकर उठाए थे।।
इसी दरोख्तर के नीचे हम कितने ही किस्से
कहानियां मनघड़ंत बाते भी सुनाए थे।।
बड़े होते-होते जवानी कि दहलीज पर आकर
तुम शहर बसे , आज तुम हमें भुलाए थे।
हम तो आज भी तेरी आस , याद में बैठ खत
लिख बैठे खुद को ना हम रोक पाए थे।।
हर एक शब्द में मेरी सांसों के तार तुमसे बंधे
यही संदेश लिख हम तुम्हें भिजवाए थे।।
लौट आओ मेरी जिंदगानी ए दोस्त मेरे
महसूस हुआ आज हम तुम्हें रुह में बसाए थे।।
सच तेरे इंतजार में मेरी पलके आज बिछी हैं
कहते हैं दिल , रुह से हम तुझे चाहे थे।।२।।

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र


Related Posts

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

हार कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

हार! बेहतर होने का अनुभव देती हैं,यह तो सीरीफ एक परिस्थिति है,सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती है,कुछ देर की

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

Leave a Comment