Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Rekha_shah

कविता –यादो का दुशाला | yadon ka dushala

कविता -यादो का दुशाला अद्भुत और अनोखा है ..तुम्हारी यादों का दुशाला, हमेशा टंगा रहता है कांधे पर, ठंड लगती …


कविता -यादो का दुशाला

कविता –यादो का दुशाला | yadon ka dushala

अद्भुत और अनोखा है ..
तुम्हारी यादों का दुशाला,
हमेशा टंगा रहता है कांधे पर,
ठंड लगती है तो ..
आकर इर्द-गिर्द लिपट जाता ,
गुनगुनी गर्माहट लिए हुए,

धूप लगती है तो
घना पेड़ बन कर ,
अपनी छाया में समो लेता है,
जहां मैं दो घड़ी आराम कर सकूं ,

बारिश होने पर सिर पर
छतरी बनकर भिगोने से ,
हर बार बचा लेता है और
अपने साए में रख लेता है ,

हर बार रूप बदल कर
मेरे साथ चलता है…
मेरे ही कांधे पर टंगा हुआ
भारहीन तुम्हारी यादों का दुशाला,

About author 

Rekha shah

रेखा शाह आरबी
बलिया (यूपी )
पता..
भीमसेन, गिरजा इलेक्ट्रॉनिस काशीपुर ,
जिला – पोस्ट -बलिया
(उत्तर प्रदेश)
पिन नंबर 277001


Related Posts

Karva chauth by Sudhir Srivastava

November 7, 2021

 करवा चौथ मैनें अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखा है, हाथों में मेंहदी,पैरों में महावर सुंदर परिधानों,

Abki kranti gulabi ho jaye by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 अबकी क्रांति गुलाबी हो जाए बंदिशें,धमकियां,फिकरे,फब्तियां, सहती, सुनती रही हो सदियों से, अबके कार्रवाई जवाबी हो जाए, तोड़ दे घमंड

Karva chauth ka Anupam tauhar by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 करवा चौथ का अनुपम त्यौहार जिन पति – पत्नी ने बनाकर रखा है अपने मन में यह भ्रम  कि उनके

Lokpriye sarkare by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 लोकप्रिय सरकारें सदभाव की बात करना माकूल नहीं यहां पर जब भाषाएं भी वतन की धर्म के नाम पर बांटी

Unhe vichlit nhi krti bdhti kinte by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 उन्हें विचलित नहीं करतीबढ़ती कीमतें उनके घर व्यावसायिक इमारतें बना दी जाती हैं बड़े बड़े ठेकों व टेंडरों के चाह्वान

Abhi ummeed bemani hai by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 अभी उम्मीद बेमानी है अभी तक धर्म है… उस पर मंडराते बहुत से सच्चे – झूठे खतरे हैं, हमारे नेताओं

Leave a Comment