Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Virendra bahadur

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं| mai tumhari Meera hun.

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं जहर का कटोरा पीने की हिम्मत हो,तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।अगर प्यार …


कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं

कविता-मैं तुम्हारी मीरा हूं| mai tumhari Meera hun.
जहर का कटोरा पीने की हिम्मत हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
अगर प्यार का अर्थ आत्मसात करना हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
विरह की वेदना सहन करने की शक्ति हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
समर्पण यानी क्या? इस का भान हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
तन-मन और आत्मा से एकाकार होना आता हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
ममत्व त्याग कर सब कुछ न्यौछावर करना आता हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
पूरी दुनिया को छोड़ने की हिम्मत हो,
तभी कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।
अगर जहर का कटोरा पीने की तैयारी न हो,
तो क्यों? कहना कि हे कृष्ण मैं तुम्हारी मीरा हूं।,

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

February 24, 2022

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से

अपनी व्यथा किसे सुनाएं

February 24, 2022

अपनी व्यथा किसे सुनाएं अपनी व्यथा किसे सुनाऊं बात समझ ना आई दुखों का पहाड़ टूटा घर में वीरानी छाई

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

Leave a Comment