कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता
भारतीयता के भाव और कट्टरता कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ …
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अब भी हिम्मत बाकी है! मुसीबतों का भंडार है,हर तकलीफ का संहार है,अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,दृढ़ता तेरा
जाने के बाद।
August 5, 2022
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हजार है!/hazar hai
August 5, 2022
हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है!
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