कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता
भारतीयता के भाव और कट्टरता कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ …
Related Posts
उनके आने से। Unke aane se
February 16, 2023
उनके आने से। एक सफर थम सा गया था, ह्रदय में, गम सा भरा था,जीवन तन्हा और अकेला मन,कैसे देखे,
ऐसा बिल्कुल पता न था | aisa bilkul pta na tha
February 16, 2023
भावनानी के भाव ऐसा बिल्कुल पता न था ऐसा जोरदार विकास होगा बिल्कुल भी पता न था व्यक्तिगत विकास के
गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं
February 16, 2023
भावनानी के भाव गड्डियों का पहाड़ घर में खड़ा किया हूं अपने इतने सालों की मौजमस्ती वाली सेवा जिसमे रोज़
जीवन जीने की कला| jeevan jeene ki kala
February 9, 2023
जीवन जीने की कला। जीवन जीने की कला,जिसने सीखी, वही आगे चला,उत्कृष्ट व्यवहार एवं विनम्रता,रखने वाला ही जीवन को सही
कविता –यादो का दुशाला | yadon ka dushala
February 8, 2023
कविता -यादो का दुशाला अद्भुत और अनोखा है ..तुम्हारी यादों का दुशाला, हमेशा टंगा रहता है कांधे पर, ठंड लगती
Bharat desh par kavita
February 7, 2023
कविता भारत देश महान, मेरी आन बान शान भारत देश महान, मेरी आन बान शानधर्मनिरपेक्षता हैं, भारत की पहचानहर धर्म
.webp)
