कविता -भारतीयता के भाव और कट्टरता
भारतीयता के भाव और कट्टरता कट्टरता का भाव गलत है,मेल न खाता भारत से।। जाग-जाग ओ सोये भारत, यह खिलबाड़ …
Related Posts
गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव
November 22, 2021
गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन तलवंडी,
राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर
November 22, 2021
राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी
बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर
November 22, 2021
बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर इतिहास के साथ छेड़खानी
Swapn ujle hai by siddharth gorakhpuri
November 17, 2021
स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने
Manzil by Indu kumari
November 17, 2021
मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो राह की रूकावट है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की
Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra
November 17, 2021
पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा
.webp)
