Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Santosh rao

कविता – चुप है मेरा एहसास

चुप है मेरा एहसास चुप है मेरा हर एहसासक्यों किया किसी ने विश्वासघात?हो गया मेरा हर लफ्ज़ खामोशआज मेरा हर …


चुप है मेरा एहसास

कविता – चुप है मेरा एहसास
चुप है मेरा हर एहसास
क्यों किया किसी ने विश्वासघात?
हो गया मेरा हर लफ्ज़ खामोश
आज मेरा हर शब्द है खामोश

छोड़ बीच सफर में मुझको
कर गया अकेला वो मुझको
मेरे स्वाभिमान को पैरो तले रौंदकर
आगे बढ गया सफर में वो

पर किस्मत का खेल तो देखो
साथ पाकर भी रह गया अकेला
आज देखो उसको, है वो खामोश
अब समझा वो दुनिया का मेला

बढ़ कर भी आगे वो बढ़ न पाया
पाकर किसी को अपना न पाया
किसी के प्रेम को कभी समझ न पाया
उसने सच्चे प्रेमी को कभी न पाया

पाया तो क्या पाया उसने
दिखावे का साथ पाया उसने
जो दिया दर्द दूसरो को उसने
उसी दर्द को पाया है आज उसने

चुप है मेरा हर एहसास
क्यों किया किसी ने विश्वासघात?
मिला उसे भी विश्वासघात
चुप है मेरा हर एहसास

About author 

संतोष कुंवर राव
प्रतापगढ (राजस्थान)


Related Posts

नए साल में नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

नए साल में नई शुरुआत! नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,नए-नए से

वह एक ही परम शक्ति-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

वह एक ही परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने

गुणगान ( गुरु)- तेज देवांगन

January 7, 2022

गुणगान( गुरु) कितना करूं गुणगान इनका,मेरे अल्फाज कम पड़ जाएंगे,अगर पीरों भी लूं इन्हे तारो में,मेरे साज कम पड़ जाएंगे.कितना

अकेला!-डॉ. माध्वी बोरसे

January 7, 2022

अकेला! दुख में हमेशा इंसान अकेला होता है, सुख में दुनिया उसके साथ होती है! उत्साह के लिए इंसान हमेशा

पधारो म्हारो राजस्थान-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

पधारो म्हारो राजस्थान! जीवंत संस्कृति, रेतीली मरुस्थलीय भूमि,  ऊंट पर बैठकर सवारी,  जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है

मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

मसूरी-जन्नत सा शहर! मसूरी भारत देश के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर, बहुत सुहावने मौसम का अनुभव देती है

Leave a Comment