कविता एकत्व | kavita ekatatva
एकत्व एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है …
Related Posts
मेघा रे
June 24, 2022
मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे मेरे संदेश को ले जाना रे जिन राहों
अकेली होती कहां
June 24, 2022
अकेली होती कहां डॉ. इन्दु कुमारी मेरे तो सब साथी मैं अकेली होती कहां हवा से भी बातें करती पेड़
जल संरक्षण
June 24, 2022
जल संरक्षण डॉ. इन्दु कुमारी जल ही जीवन है जीवन के संजीवन है इसे बचाना पुण्य कार्य यही असली जनसेवार्थ।
लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी
June 23, 2022
“लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर
कितना कठिन होता है ना? माँ होना
June 23, 2022
कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों
कविता – छाँव सा है पिता
June 23, 2022
कविता – छाँव सा है पिता सिद्धार्थ गोरखपुरी गलतफहमी है के अलाव सा है पिता घना वृक्ष है पीपल की

.jpg)