कविता एकत्व | kavita ekatatva
एकत्व एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है …
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भावनाओं को व्यक्त-डॉ. माध्वी बोरसे
January 16, 2022
भावनाओं को व्यक्त! क्यों होते हैं हम स्वयं के साथ सख्त,चलो करें, अपनी भावनाओं को व्यक्त,चिकित्सक भी होता है कभी
इन्सानियत के पक्ष में- जितेन्द्र ‘कबीर’
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इन्सानियत के पक्ष मे क्या तुम सीखना चाहते होखुद कई दिन भूखे रहकरअनाज की कीमत समझना? खुद पर कोई जुल्म
अश्रु- जयश्री बिरमी
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हालात- जयश्री बिरमी
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शेखियां बघारने का मौसम- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 15, 2022
शेखियां बघारने का मौसम चुनाव आ गये हैं और अब… देश को तरक्की की राह परले जाएगा कोई,तो कोई यहां

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