कविता एकत्व | kavita ekatatva
एकत्व एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है …
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वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर
February 14, 2022
वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही
छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’
February 14, 2022
छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी
तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर
February 14, 2022
तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है
विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर
February 14, 2022
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मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी
February 14, 2022
ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही
खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी
February 14, 2022
खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

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