Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

कविता – अश्रु | kavita – Ashru

कविता – अश्रु ये आसू नही मेरा क्रोध है,क्यू तुम्हे नही ये बोध है,कमजोर मत समझो तुम मुझे,यह तुम पर …


कविता – अश्रु

ये आसू नही मेरा क्रोध है,
क्यू तुम्हे नही ये बोध है,
कमजोर मत समझो तुम मुझे,
यह तुम पर आने वाले गुस्से का विरोध है।

कदर करो इन अश्रु की,
ये एक विकल्प है तुम्हे न तकलीफ मिले,
अगर भड़ास निकल गई जख्मों की,
तो तुम रह जाओगे हिले।

इंसान है हम शेतानो की तरह चिल्लाना हमारा संस्कार नहीं,
कोई बात बुरी लग जाए तो इंसानियत के नाते भुलाना है सही।

हमारे आसू एक बार बरदाश होजाएंगे तुम्हे,
खामोशी भी सहन हो जाएगी तुम्हे,
पर हमारे क्रोध की आहट तुम्हे डरा न दे,
तुम्हारा शैतानी स्वभाव को और बढ़ावा न दे।

समझदारी से जिए,
गुस्सा निकलने की जगह रिश्तों में थोड़े आसू ही निकले।।
अहंकार में क्या रखा है?
और इसके साथ तो रावण भी नही जी सका है।।

About author

कविता - अश्रु | kavita - Ashru
डॉ. माधवी बोरसे सिंह इंसा

डॉ. माधवी बोरसे सिंह इंसा।
शिक्षाविद एवं कवियत्री
जयपुर (राजस्थान)

Related Posts

आज भी वो दिन हमको याद है

August 5, 2022

याद है वो दिन आज भी आज भी वो दिन हमको याद हैसर पर हमारे मोहब्बत ए ताज हैआज सीने

हजार है!/hazar hai

August 5, 2022

 हजार है! मोहब्बत की तलाश है, गम देने वाले हजार है! सच्चाई की तलाश है, झूठ बोलने वाले हजार है!

जिंदगी तो है बहता झरना/zindagi to hai bahta jharna

August 2, 2022

जिंदगी तो है बहता झरना कितनी सारी जिंदगियाँ मिलती है रोजानाहर जिंदगी जैसे है किताब का एक पन्नापर कहाँ मुनासिब

पापा हमारे लिए हैं भगवान

July 31, 2022

 पापा हमारे लिए हैं भगवान |papa hamare liye bhagwan hai हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान उनकी पनाह में रहना

स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye

July 23, 2022

 स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye  हम सभी को आम तौर

अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते

July 22, 2022

 अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते  न करनी पड़े फरियाद हमें  अगर आप ऐसे होते  न करनी पड़े नफ़रत

PreviousNext

Leave a Comment