Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kanchan chauhan, poem

कविता –अभिलाषा| kavita -Abhilasha

अभिलाषा अपने ही नभ में उड़ना मुझको,अपना संसार बनाना है। कोमल मन की अभिलाषा है,अंबर से ऊपर जाना है।कुरीतियों की …


अभिलाषा

कविता –अभिलाषा|  kavita -Abhilasha
अपने ही नभ में उड़ना मुझको,अपना संसार बनाना है।

कोमल मन की अभिलाषा है,अंबर से ऊपर जाना है।
कुरीतियों की बेड़ी पग में,मन फिर भी उड़ता है नभ में।
कोमल मन को झंझावात से,अब मुझे ही पार लगाना है।
जोखिम को अपने सिर ले,अब पहला कदम बढ़ाना है।
पहला कदम जब उठ जाता है,नयी डगर इक बनती है।
नयी डगर पर चल कर ही तो, मुझको मंजिल को पाना है।
कोमल मन की अभिलाषा है, अंबर से ऊपर जाना है।
संघर्षों से जीत कर मुझको,अपना संसार बनाना है।

कंचन चौहान 

Related Posts

गुमशुदा जरा लिख तहरीर मेरी

November 10, 2023

गुमशुदा जरा लिख तहरीर मेरी ऐ थाना – ए – गुमशुदा जरा लिख तहरीर मेरीखो गया हैं सुकून और अच्छी

कविता –करवा चौथ

October 31, 2023

 करवा चौथ सुनो दिकु…..अपना सर्वस्व मैंने तुम्हें सौंप दिया हैतुम्हारे लिए मैंने करवा चौथ व्रत किया है तुम व्रत करती

कविता –मैं और मेरा आकाश

October 30, 2023

मैं और मेरा आकाश मेरा आकाश मुझमें समाहितजैसे मैप की कोई तस्वीरआँखों का आईना बन जाती हैआकाश की सारी हलचलजिंदगी

कविता – चुप है मेरा एहसास

October 30, 2023

चुप है मेरा एहसास चुप है मेरा हर एहसासक्यों किया किसी ने विश्वासघात?हो गया मेरा हर लफ्ज़ खामोशआज मेरा हर

कविता क्या हुआ आज टूटा है इंसान

October 28, 2023

क्या हुआ आज टूटा है इंसान क्या हुआ जो आज बिखरा है इंसानक्या हुआ जो आज टूटा हुआ है इंसानअरे

कविता – याद करती हो?

October 28, 2023

याद करती हो? सुनो दिकु…. क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़

PreviousNext

Leave a Comment