Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mausam-Khan, poem

कब बदलेंगे| kab badlenge

लिखते बहुत है,पढ़ते भी बहुत हैसोचते भी है,लेकिन कुछ बदला नहीं।। वो जज़्बाती होकर जज्बातों को लिखते हैं बीती बाते …


लिखते बहुत है,पढ़ते भी बहुत है
सोचते भी है,लेकिन कुछ बदला नहीं।।

वो जज़्बाती होकर जज्बातों को लिखते हैं बीती बाते लिखी,आने वाला कल भी लिखते है,
ये सबकुछ पढ़ कर फिर भी बदले नहीं हैं,

पहले लिखे विचार पढ़ते थे, उसे दिल में अमिट स्याही से लिखते थे,
आज नही वो कल काम आयेगी,ये सोच कर उसे याद भी रखते थे
लेकिन इतना होने के बाद भी कुछ बदला नहीं ।।

आज कलम से कुछ हमने लिखने की कोशिश की,सब तरफ से एक ही आवाज आई लिखोगे किया, कुछ बदला ही नहीं ।।

About author 

मौसम खान  अलवर राजस्थान
मौसम खान
 अलवर राजस्थान


Related Posts

kavita sanwr jati hai by ajay prasad

June 9, 2021

संवर जाती है धूप जब भी बर्फ़ सी पिघल जाती हैतो मजदूरों के पसीने में ढल जाती है।ठंड जब कभी

kavita sarkari aakado me by jitendra kabir

June 8, 2021

सरकारी आंकड़ों में… सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती हैं सिर्फ मौतें, दर्ज नहीं होती लेकिन उनमें मरने वालों की तकलीफें,

kavita sakhi keh do by anita sharma

June 8, 2021

 सखी कह दो” अभिलाषा में आशा जोड़ू,सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।इच्छाओं का अंबार समेटू,या अनुरागी पथ को चुन लूँ।

kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari

June 8, 2021

 पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार..  मंझली काकी और सब  कामों के  तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और  बैठ

gazal-ateet ka geet by abhishek sudhir

June 8, 2021

 ग़ज़ल :- “अतीत का गीत” आज तुम  पर  कोई  गीत  लिखने  बैठा  हूँ  तुम्हें इस  मन  का   मीत  लिखने   बैठा   हूँ 

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav

June 7, 2021

 भावनाएँ बारिश की ****************ये भी अजीब सी पहली हैकि बारिश की भावनाओं को तोपढ़ लेना बहुत मुश्किल नहींसमझ में भी

Leave a Comment