Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mausam-Khan, poem

कब बदलेंगे| kab badlenge

लिखते बहुत है,पढ़ते भी बहुत हैसोचते भी है,लेकिन कुछ बदला नहीं।। वो जज़्बाती होकर जज्बातों को लिखते हैं बीती बाते …


लिखते बहुत है,पढ़ते भी बहुत है
सोचते भी है,लेकिन कुछ बदला नहीं।।

वो जज़्बाती होकर जज्बातों को लिखते हैं बीती बाते लिखी,आने वाला कल भी लिखते है,
ये सबकुछ पढ़ कर फिर भी बदले नहीं हैं,

पहले लिखे विचार पढ़ते थे, उसे दिल में अमिट स्याही से लिखते थे,
आज नही वो कल काम आयेगी,ये सोच कर उसे याद भी रखते थे
लेकिन इतना होने के बाद भी कुछ बदला नहीं ।।

आज कलम से कुछ हमने लिखने की कोशिश की,सब तरफ से एक ही आवाज आई लिखोगे किया, कुछ बदला ही नहीं ।।

About author 

मौसम खान  अलवर राजस्थान
मौसम खान
 अलवर राजस्थान


Related Posts

अधूरे ख़्वाब-नंदिनी लहेजा

February 7, 2022

अधूरे ख़्वाब मन की अनेकों हसरतों को, इक सांचे में जो ढाले।नयनों में समाते है वो,बन ख़्वाब बड़े ही प्यारे।लक्ष

कृत्रिम बुद्धिमता-एडवोकेट किशन सनमुखदास

February 7, 2022

कविताकृत्रिम बुद्धिमता आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है हर काम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भावना समाई है मानवीय दिनचर्या

गणतंत्र दिवस-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 7, 2022

गणतंत्र दिवस! 26 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान लागू किया,भारत को पूर्ण रूप से गणतंत्र घोषित कर दिया! परेड, भाषण,

हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं

February 7, 2022

कविता हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हमारी किस्मत खुली भारतीय सभ्यता संस्कृति हमें मिली हमारी पीढ़ियों की

ई-कचरा

February 7, 2022

ई-कचरा! कंप्यूटर और उससे संबंधित अन्य उपकरण,टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन से जुड़े उत्पादन,उपयोग से बाहर होने पर कहते हैं

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

Leave a Comment