Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

कब प्रशस्त होगी हर नारी

“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ …


“कब प्रशस्त होगी हर नारी”

अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ साँस ले सकें,
सदियों से जन्म लेने को बेताब कुछ एक नारियों के ख़्वाबों का कारवाँ कोख तलाश रहा है।

खिलना है, फलना है, उड़ना है पर न उनके हिस्से की कोई धरा है, न उड़ने को आसमान, 

दो कूलों की महारानी पड़ी आज भी विमर्श की धार पे।

मरुस्थल में कटहल के पेड़ों सी तरस रही है, उम्मीदों का दीया मन में जलाएँ, 

तलाश रही है कोई झरना किसी उर से बहता हो कहीं तो, हल्की सी भीग लें।

नारी मन की कल्पनाओं से स्खलन होता है कई उम्मीदों के शुक्राणुओं का, न कोई कोख मिलती है, 

न हौसलों का अंडा फलित होने की ख़ातिर पलकें बिछाए बैठी है।

दफ़न कर दिए जाते है अरमान कुछ स्त्रियों के ऐसे, 

जैसे बेटियों के गर्भ को कतरा-कतरा काटकर कोख में ही कत्ल कर दिया जाता है।

लकीरें बांझ ही रहती है, नहीं खिलती कोई कली खुशियों की, 

सत्तात्मक सोच की बलि चढ़ते कुछ ज़िंदगियाँ यूँही कट जाती है।

सहचर, सखी, सहगामी फिर भी लाचार, बेबस, 

बेचारी समाज के तयशुदा मापदंडों पर खरी उतरने के लिए ही जन्मी, कब तक चरित्र का प्रमाण देती रहेगी।

बदलाव की बयार हल्की सी उठते जानें कब बवंडर का रुप लेगी, 

जो हर प्रताड़ीत वामाओं की लकीरों से दर्द का दरख़्त उड़ाकर ले जाएगी।

बेबस, असहाय, अकिंचन नारियों को देख नारी दिन का मनाना मृत्यु पर्यात की क्रिया लगती है, 

यथार्थ इतना क्रूर कि बलात्कार की हर घटना तमाचे की तरह समाज के गाल पर पड़ती है।

विमर्श है तो परिमार्जन का मार्ग, जो सदियों से कलम तोड़ हुआ, 

प्रशस्त कब होगी हर नारी इस सवाल पर चलो अब काम किया जाए।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

कविता – रातों का सांवलापन

November 12, 2023

रातों का सांवलापन आकाश रात में धरती को जबरन घूरता हैक्योंकि धरती आसमान के नीचे हैऔर मेरा मनऊपर खिले उस

कविता –मंदिर में शिव जी

November 12, 2023

मंदिर में शिव जी मैं भक्ति का स्वांगी नहीं , पर आस्तिक जरूर हूँहालात बयां करूँया शिकायत मुझे बेल पत्तों

Kavita pavitra rishta | पवित्र रिश्ता

November 10, 2023

 शीर्षक: पवित्र रिश्ता सुनो दिकु… दुख अब अकेले नहीं सहा जा रहा तुम आज होती तो लिपटकर रो लेता मेरी

झांसी की रानी पर कविता | poem on Rani laxmi bai

November 10, 2023

झांसी की रानी पर कविता | poem on Rani laxmi bai रणचंड भयंकर और प्रचंड किया झांसी की रानी नेअपना

Kavita :आत्मायें मरा नहीं करती

November 10, 2023

आत्मायें मरा नहीं करती आत्मायें मरा नहीं करतीमैंने बचपन में सुना थाकिसी नायाब मुख से वे जिंदा रहती हैंअपने खेतों-

प्रेम इंतज़ार कर रहा है | kavita prem intezar kar raha hai

November 10, 2023

कविता : प्रेम इंतज़ार कर रहा है सुनो दिकु…दिल के दर्द की पीड़ा अब नहीं सही जा रहीमेरे होंठों पर

PreviousNext

Leave a Comment