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कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़

कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़ भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने में समर्पित …


कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़

कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़
भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने में समर्पित

कंप्रेस्ड बायोगैस की उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका – ऑटोमेटिक, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में सीएनजी की जगह ले सकता है – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर जलवायु परिवर्तन के भयंकर प्रकोप को दुनिया का हर देश भुगत रहा है,जिसकासमाधान करने के लिए हर देश के नागरिकों को भी आगे आने की ज़रूरत है। हालांकि कई वर्षों से अनेक वैश्विक मंचों पर इसके समाधान संबंधी बातें, रणनीतियों, नीतियों ट्रिटियों का उल्लेख और क्रियान्वयन होता है। वैसे तो इसका सबसे बड़ा जीता जागता पेरिस समझौता उदाहरण है, जिसमें 196 देश शामिल हैं, जो 4 नवंबर 2016 से लागू हुआ है। परंतु हमारे माननीय पीएम ने दिनांक 16 अप्रैल 2023 को एक कार्यक्रम के संबोधन में विशेष रुप से सटीक बात कही कि जलवायु परिवर्तन के निदान की बातें घर-घर के खाने की टेबल तक चर्चा होकर निदान में सहयोग का संकल्प लेने की जरूरत है। पीएम की इस बात पर दुनियां का ध्यान आकर्षित हुआ है और अनेक उपायों पर मंथन शुरू हो गया है। चूंकि इसी की कड़ी में भारत ने कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 को माननीय पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस मंत्री और माननीय सड़क परिवहन मंत्री के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ है, जो उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा। इसलिए आज हम चर्चा करेंगे कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़।
साथियों बात अगर हम इस वैश्विक सम्मेलन के दूरगामी परिणामों के आगाज़ की करें तो, आईएफजीई -सीबीजी प्रोड्यूसर्स फोरम भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की सहायता से एक मजबूत सीबीजी फाउंडेशन और विकास के लिए प्रगतिशील नीतिगत ढांचे की ओर विषय के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस पर दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का आयोजन हुआ है। इस सम्‍मेलन का उद्देश्य कंप्रेस्ड बायोगैस उद्योग के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा की गई पहलों के बारे में उद्योग को अवगत कराना तथा उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां नीतिगत संशोधन करने की आवश्यकता है।भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पूरी तरह समर्पित है और मौजूदा नेतृत्‍व और सरकार द्वारा उत्सर्जन को कम करने के लिए विभिन्न माध्यमों द्वारा कई पहल शुरू की गई हैं। कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) की भी उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका है और इसे सतत योजना (सस्ते परिवहन के लिए सतत विकल्प) द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है। सीबीजी में उच्च कैलोरी मान और सीएनजी के समान ही गुण हैं और इसका एक वैकल्पिक हरित नवीकरणीय ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जा सकता है तथा यह देश में बायोगैस की प्रचुर उपलब्धता को देखते हुए ऑटोमोटिव, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में सीएनजी की जगह ले सकती है। इस सम्मेलन में प्रदर्शन करने की सुविधा भी उपलब्‍ध करा गईई और इसमें 200 से अधिक प्रतिनिधि भाग लिए हैं। जिनमें सीबीजी प्लांट डेवलपर्स, सीबीजी प्लांट के एलओआई धारक, ठेकेदार, संभावित निवेशक, सलाहकार, नीति निर्माता, केंद्र और राज्य सरकार की कंपनियां संस्थाएं इस सम्मेलन को सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस सम्‍मेलन में फीडस्टॉक उपलब्धता, सीबीजी उठान, फरमेंटिड जैविक खाद, कार्बन क्रेडिट, प्रोत्साहन, सीबीजी उद्योग के लिए निवेश एवं वित्‍तपोषण, विभिन्न राज्यों की जैव ईंधन नीतियां और सीबीजी निर्माताओं के बारे में राज्य नीतियां तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के बारे में ध्‍यान केंद्रित किया गया। इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) के बारे में कुछ जानकारी :इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) एक महत्‍वपूर्ण संगठन है जो जैव-ऊर्जा, सौर पवन, मिनी पनबिजली, ज्वारीय, भू-तापीय ऊर्जा सहित अपनी समग्रता में राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। आईएफजीई विविध उद्योगों, व्‍यवसायों और सेवाओं के दूरदर्शी और हितधारकों के समर्पित समूह की भागीदारी है जिसका उद्देश्‍य एक स्‍थायी ऊर्जा तंत्र बनाना और चुनौतियों तथा चिंताओं को कम करना है। आईएफजीई कार्यशालाओं, सम्मेलनों और नीति समर्थित पहलों के आयोजन जैसी पहुंच गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक विकास के प्रत्येक क्षेत्र में स्थायी रूप से ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के मिशन के साथ हरित ऊर्जा के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करता है।
साथियों बात अगर हम इसी कड़ी में कुछ दिन पहले सिविल-20 इंडिया ग्रीन हाइड्रोजन की करें तो महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित सिविल 20 इंडिया (सी-20) सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा था कि हम तेजी से फॉसिल फ्यूल से ग्रीन फ्यूल की ओर बढ़ रहे हैं। सी-20, जी-20 के ऑफिशल ग्रुप्स में से एक है जो जी-20 के नेताओं तक अपनी बात पहुंचाने के दुनिया भर की सिविल सोसाइटी को एक मंच प्रदान करता है। भारत 2070 तक कार्बन न्यूट्रल बनने के लिए मिशन मोड में हैं। उन्होंने कहा कि देश को अच्छी सड़कों की जरूरत हैलेकिन साथ ही साथ इकोलॉजी की सुरक्षा भी जरूरी है। हम ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ रहे हैं’। हमें पारिस्थितिकी की भी रक्षा करनी है। हम ग्रीन हाइड्रोजन की ओर बढ़ रहे हैं और हमारे पास इलेक्ट्रिक बसें हैं। उन्होंने कहा था कि सामाजिक एवं आर्थिक समानता लाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है और वसुधैव कुटुम्बकम दुनिया में सभी के लिए समान विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का संकेत देता है। वसुधैव कुटुम्बकम भारत की जी20 अध्यक्षता के एक शक्तिशाली संदेश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा और मूल्य आधारित परिवार व्यवस्था भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना और उसके जीवन को सार्थक बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। बता दें कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर उनका का काफी जोर रहा है और वह दावा भी कर चुके हैं कि 2030 तक भारत में 2 करोड़ इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी। भारत सरकार बायो फ्यूल की तरफ भी तेजी से बढ़ रही है और इसने 2030 तक 20 फीसदी इथेनॉल की ब्लेंडिंग रखा था जिसे बाद में बदलकर 2025 तक कर दिया गया था।
साथियों बात अगर हम उत्सर्जन कम करने के 196 देशों के पेरिस समझौते रूपी पहिए की करें तो यह जलवायु परिवर्तन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।इसे 12 दिसंबर 2015 को पेरिस, फ्रांस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप21) में 196 दलों द्वारा अपनाया गया था। यह 4 नवंबर 2016 को लागू हुआ। इसका व्यापक लक्ष्य वैश्विक औसत तापमान में अच्छी तरह से वृद्धि को रोकना है। पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे और पूर्व-औद्योगिक स्तरों से तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाएं। ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 2025 से पहले चरम पर होना चाहिए और 2030 तक 43 फ़ीसदी की गिरावट होनी चाहिए।पेरिस समझौता बहुपक्षीय जलवायु परिवर्तन प्रक्रिया में एक मील का पत्थर है , क्योंकि पहली बार, एक बाध्यकारी समझौता सभी को लाता है। जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और इसके प्रभावों के अनुकूल होने के लिए राष्ट्र एक साथ। राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) अपने एनडीसी में, देश पेरिस समझौते के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्रवाई करेंगे । देश अपने एनडीसी कार्यों में भी संवाद करते हैं कि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए लचीलेपन का निर्माण करेंगे ।दीर्घकालिक रणनीतियाँ
दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में प्रयासों को बेहतर बनाने के लिए, पेरिस समझौता देशों को दीर्घकालिक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विकास रणनीतियों (एलटी-एलईडीएस) को तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित करता है एलटी एलईडीएस एनडीसी को दीर्घकालिक क्षितिज प्रदान करते हैं । एनडीसी के विपरीत, वे अनिवार्य नहीं हैं। फिर भी, वे एनडीसी को देशों कीदीर्घकालिक योजना और विकास प्राथमिकताओं के संदर्भ में रखते हैं, भविष्य के विकास के लिए एक दृष्टि और दिशा प्रदान करते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि कंप्रेस्ड बायोगैस वैश्विक सम्मेलन 17-18 अप्रैल 2023 का आगाज़।भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने में समर्पित कंप्रेस्ड बायोगैस की उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका – ऑटोमेटिक, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में सीएनजी की जगह ले सकता है।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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