Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

ऐ नदी ऐ नदी- चन्दा नीता रावत

ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदीकल कल करती बहती है किनारो पर तुम्हारे जिन्दगी बसा करती हैविशाल रूप …


ऐ नदी ऐ नदी

ऐ नदी ऐ नदी- चन्दा नीता रावत
ऐ नदी ऐ नदी
कल कल करती बहती है

किनारो पर तुम्हारे जिन्दगी बसा करती है
विशाल रूप तुम्हारा दृश्य तुम्हारे अनोखे है

कही झरना कही झील हर रुप मे भा जाती हो
परिस्थितियो को देख तुम रुप दिखाया करती हो

जीवन दायनी अन्नय दायनी
चंचल सी निर्मल सी बहती रहती हो

स्त्रोत तुम हिमालय की
अन्त हो तुम समुद्र की

चन्दा नीता रावत
वाराणसी


Related Posts

सतत विकास-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

सतत विकास! करें गरीबी का निवारण, मिलकर बचाए पर्यावरण,हो समाज मैं आत्मनिर्भरता,बिना फर्क किए हो लैंगिक समानता! कोई व्यक्ति न

खुद को परख-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

खुद को परख! करके दिखा तू सोच मत, इतनी सी बात तू दिल में रख,जज्बा हो तुझ में जबरदस्त,खुद को

काश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं

February 4, 2022

कविताकाश!!! बचपन के वह दिन लौट आएं बचपन के दिन कितने सुहाने थे काश कभी ऐसा करिश्मा भी हो जाए

बजट-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

बजट! अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना,इसके जरिए यह है सरकार को सोचना,अपने राज्य की तुलना में,सरकार

माता-पिता-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 4, 2022

माता-पिता मेरे आदरणीय, प्यारे माता-पिताआपका प्रेम, मेरी जिंदगी है,आप दोनों ही, मेरी बंदगी है! आप ही मेरे माता-पिता हो, हर

एक बात सुनो -चन्दानीता रावत

February 3, 2022

एक बात सुनो  सुनो सुनो एक बात सुनो अन्धेर नगरी चौपट राजा की बहरे राज्य सरकार कीदिन रात एक कर

Leave a Comment