Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

उगलते भी न बने निगलते भी नहीं बने

 उगलते भी न बने निगलते भी नहीं बने  आज विश्व तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कगार पर खड़ा हैं …


 उगलते भी न बने निगलते भी नहीं बने 

उगलते भी न बने निगलते भी नहीं बने
आज विश्व तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कगार पर खड़ा हैं तब सभी देशों कई मुसीबतों का सामना कर रहें हैं और ओर कई मुसीबतें मुंह फाड़े तैयार खड़ी हैं।24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ रशिया और यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा ये तो कह नहीं सकते किंतु युद्ध के परिणाम वही होते हैं जो हम आज देख रहें हैं।रशिया एक के बाद एक प्रांतों को सर करता का रहा हैं और तबाही मचाता जा रहा हैं।इस युद्ध का बीजारोपण तो 2014 से हो गया था,ये आज के राजनैतिक मतभेद नहीं हैं।ये तो तब शुरू हुए जब क्रिमिया और डोनबास को यूक्रेन का हिस्सा जाहिर किया गया था तब से ही दोनों देशों के सेपरेटिस्टों ने नेवल इंसिडेंट्स, साइबर वारफेयर और राजकीय तनावों की शुरुआत हुई थी। जैसे आर्मेनिया और अजरबाजान ,इजराइल और पेलस्टाईन जैसे सभी युद्धों में भी आर्थिक,साइबर,ट्रेड आदि वॉर से ही युद्ध की शुरुआत होई थी,वैसे ही यूक्रेन और रशिया के साथ भी हुआ हैं।सिर्फ रणभूमि में ही नहीं होता है युद्ध।जिसके परिणाम स्वरूप अब रशिया और यूक्रेन की सरहदों पर भी युद्ध की स्थिति कायम होनी शुरू हो गई हैं जो भीषण से भीषणतर और भीषणतम होता जा रहा हैं।।जनवरी के महीने से ही युद्ध के नगाड़े बजने शुरू तो हो ही गए थे किंतु 24 फरवरी के दिन ऑफिशियल युद्ध शुरू हो गया।पहले तो था की रशिया जैसे ताकतवर देश के सामने यूक्रेन कितने दिनों तक टिक पायेगा लेकिन आज महीने से भी ज्यादा समय हो गया हैं और रशिया यूक्रेन में तबाही मचा रहा हैं।एक के बाद एक शक्तिशाली आयुधों से वा से यूक्रेन के लोग त्राहिमाम पुकार गाएं हैं।बेलारूस की सीमा पर भी महायुद्ध अभ्यास 3000 सैनिकों के साथ शुरू ही हैं।क्या रशिया ने वैक्यूम बॉम्ब का प्रयोग किया हैं यूक्रेन पर?ये बॉम्ब हवा में से ऑक्सीजन का शोषण कर बहुत ही भयानक परिणाम देता हैं।एक और केमिकल आयुध का उपयोग का भी शक हो रहा हैं,वह हैं फॉसफरस का उपयोग कर बनाया हुआ बॉम्ब।अमेरिका ने अपने नागरिकों को भी यूक्रेन से बचाने के लिए भी अपने सैन्य को नहीं भेजा था क्योंकि उस परिस्थिति में विश्व युद्ध का खतरा बढ़ जाना था।किंतु यूक्रेन को सैनिक सहायता के अलावा सारी सहायताएं उपलब्ध अमेरिका के साथ साथ दूसरे नाटो देश भी कर रहें हैं।वैसे जर्मनी में हाइड्रेजन बॉम्ब आदि आयुधों को इक्कठा कर लिया गया हैं और सभी देश संयम से काम ले रहे हैं किंतु कब तक ये संयम कायम रहेगा ये कहना मुश्किल हैं। यूक्रेन की सेना भी खूब युद्धाभ्यास कर रहें हैं, टैंको से दुश्मनों का सामना करना।हेलीकॉप्टर से उतर कर दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने की कवायत अभी भी शुरू हैं।अमेरिका ने टैंक को मारने के लिए जैवलिन रॉकेट की आपूर्ति की हैं ये तब काम आएगा जब रूस के अजेय टैंक यूक्रेन पर हमला करेंगे। नाटो देशों द्वारा ये सारी योजनाएं पहले से ही बन चुकी थी और रशिया भी इनके जवाब में तैयार ही था।इतना लंबा चला युद्ध कोई भी तरीके से रोका जाएं ऐसी संभावनाएं कम ही दिख रही हैं ।रशिया की मांगे ही ऐसी हैं जिसे पूरा करना असम्भव नहीं तो भी मुश्किल तो जरूर हैं। रूस के हिसाब से युद्ध को रोकने के लिए रशिया ने चार शर्ते रखी हुई हैं, यूक्रेन नाटो में सम्मिलित न हो, वे भी नाटो का सभ्य पद लेने की जिद छोड़ दे,तटस्थ रहने के लिए संविधान में बदलव करें, सैन्य कार्यवाही बंद करे,क्रिम्या को रूस के हिस्से में मान्यता दी जाएं,डोनेस्क और लिहांस को स्वतंत्र देश घोषित किया जाएं। विश्व राजनितीग्यो के बीच भी मंत्रनाएं शुरू हैं किंतु कोई हल दिखता नहीं लग रहा।चीन और बाईडन के बीच भी बात चीत हो रही हैं,वहीं बाईडन पोलैंड में अपने खास विमान से जो न्यूक्लियर हमलों में भी सुरक्षित रखता हैं,पहुंच चुके हैं।ब्रिटन के प्रेसिडेंट बोरिस जॉनसन भी पोलैंड में ही हैं,जो पूरे हालातों पर नजर रखे हुए हैं। वैसे ही हमारे प्रधानमंत्री भी कई विदेशी नेताओं से बातचीत कर रहें है।विश्व के चिंता वाले हालातों में विश्व युद्ध के हालात हैं तब सभी देशों ने अपने अपने गुट बना लिए हैं।अब हालात बहुत ही बिगड़े हुए हैं,पोलैंड के उपर भी रशिया के बॉम्बर उड़ने की खबरें आई हैं तब हालातों का ज्यादा बिगड़ना तय हैं।रशिया अब भी अपनी जिद पर अड़ा हुआ हैं तब यूक्रेन का युद्ध विराम करना शक्य नहीं हैं। कीव के पास एक गांव को यूक्रेन ने वापस लिया वह कुछ वालंटियर्स की मदद से लिया हैं।तो क्या ये रिवर्स सिचुएशन हैं क्या? क्या अभी इ 4 बी नाइट वॉच जिसे डूम्स डे भी कहा जाता हैं ऐसे विमान में आए बाइडन क्या संदेश दे रहे हैं?रशिया को चैलेंज दे रहे हैं?रशिया से सिर्फ 1000 km दूर होने का संदेश भी दिया हैं।ऐसे ही क्या यूरोपियन कंट्रीज भी चैलेंज कर रहे है?उकसा रहे हैं रशिया को? शुरू में रशिया का पलड़ा भारी था किंतु अब रूस के उपर यूक्रेन भारी पड़ता जा रहा हैं ।नाटो के देश भी पूरी तैयारियों के साथ बैठे हैं तो रूस भी पूरी तैयारियों से लैस हैं।अब रूस ने भी माना हैं कि उसके भी काफी सैनिक मारे गए हैं। कहीं रूसी सैनिकों के हाथ बंधे हुए हैं और वे युकरेनी सैनिकों से घिरे हुए दिखते हैं उन्हे बंधक बनाएं गए हैं।उनकी कई टैंक और गड्डियों को भी नष्ट किया हैं या कब्जे किए हुए हैं ऐसा वीडियो भी सोशल मीडिया में डाला हुआ हैं। रूस ने भी माना है कि 1351 सैनिक मारे गए है और 4000 ज्यादा घायल हुए हैं। वैसे रशिया के प्वाइंट ऑफ व्यू से देखें तो उसका जो ग्लोबल पॉलिटिक्स में स्थान हैं वह दूसरी वर्ल्ड वॉर में हिस्सा ले अपने हजारों लोगों की कुर्बानी दे वर्ल्ड वॉर के बाद भी यू एस एस आर की सार्वभौमिकता बनाएं रखी थी।उसके बाद ही यू एन का गठन कर विश्व को युद्ध मुक्त रखने किए कुछ नियम कानून बनाएं गए थे उसके बाद गर्बाचोव के टाइम पर ’ग्लास नोस्त ’ वाला फॉर्मूला ले आए और देश को पारदर्शक बनाते बनाते विखंडित कर दिया और छोटे छोटे टुकड़ों में अलग अलग राष्ट्र स्थापित कर दिए फिर भी रशिया की ताकत कम नहीं हुई, उसका सुपर पावर का ओहदा कायम रहा।अमेरिका जैसे पहले बताया वैसे अपनी इकोनोमी को संभाल ने के लिए हथियारों की बिक्री कर उसे संभाल ने की कोशिश कर रहा लगता हैं।वैसे भी जग गुरु अमेरिका को अपनी ग्लोबल सत्ता को चुनौती देने वालें देशों को बरबाद करने का युद्ध ही एक तरीका हैं लेकिन इन दोनों की लड़ाई में बेचारा यूक्रेन और उसकी प्रजा को सहन करना पड़ रहा हैं।यूक्रेन आर्थिक,भौतिक और सामाजिक रूप से तो परेशान हो ही रहा हैं उपर से पलायन और धायल होते और जान गंवाते लोगों को कैसे प्रेसिडेंट जेलेंस्की देख सकते हैं।भारत के विभाजन के बाद बना पाकिस्तान भी तो इतने सालों से भारत में अशांति फैलाने के लिए अमरीका की मदद ले ही रहा था।पहले सीधे युद्ध करता रहा किंतु बार बार हर जाने की सूरत में प्रॉक्सी वॉर कर देश के विकास में रोड़े अटकता रहा।शायद इसी परिस्थिति से अपने देश को बचाने के लिए रूस इतने खतरे उठा रहा हैं। वैसे रशिया के भी अंदरूनी हालत ठीक नहीं हैं,जो प्रतिबंध अमेरिका ने लगाएं है उसकी वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहा रशिया अपने लोगों के विरोध का सामना कर रहा हैं।खाने पीने और जीवन जरूरियात की चीजों का उपलब्ध न होना और कुछ विदेशी प्लास्टिक मनी का चलन का बंद हो जाना आदि से प्रजा भी दुखी हैं।ये युद्ध भी इतना लंबा चलेगा ये किसी ने भी नहीं सोचा था,ये धारणा से भी ज्यादा लंबा चलने से लोगों को बहुत ही असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा हैं।उपर से अंदरूनी राजनैतिक दबाव और एफएसबी, फेडरल सिक्योरिटी सर्विस के अंतर्गत पुतिन का तख्ता पलट की भी बातें हो रही हैं। इतने दिनों तक युद्ध चलने से ये असंतोष बढ़ रहा हैं,जिसके कारण विद्रोह की संभावना बढ़ रही हैं। अब फ्रांस ने परमाणुं सबमरीन समुंद्र में उतारा हैं तो रशिया भी कही कम नहीं हैं।ये सुप्रीमेसी की जंग रशिया,यूक्रेन , यू के और अमेरिका को कहां ले जाके रखेगा ये तो भगवान ही जाने।और इस हालतों का असर हम जैसे देशों पर कितना और कैसे ये भी सोचने वाली बात हैं।क्या रूस ने छछुंदर निगला हैं,जो न उगलते बने और न ही निगलीते।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद

( संकलित)


Related Posts

5 वां राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (एसएफएसआई) 2023 जारी

June 11, 2023

5 वां राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (एसएफएसआई) 2023 जारी भारत में खाद्य सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में सभी को सुरक्षित पौष्टिक

बच्चों को अकेलापन न महसूस हो, इसके लिए मां-बाप को उन्हें हमेशा स्नेह देना चाहिए |

June 6, 2023

बच्चों को अकेलापन न महसूस हो, इसके लिए मां-बाप को उन्हें हमेशा स्नेह देना चाहिए उर्वी जब से कालेज में

भारत अमेरिका मैत्री – दुनियां के लिए एक अहम संदेश | India America Friendship – An Important Message to the World

June 6, 2023

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच स्थाई मित्रता का जश्न मनाएं भारत अमेरिका मैत्री – दुनियां के लिए एक

भयानक ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन ?Who is responsible for the terrible train accident?

June 5, 2023

भयानक ट्रेन हादसे का जिम्मेदार कौन ? परिजनों को रोते बिख़लते देख असहनीय वेदना का अनुभव सारे देश ने किया

44 वें विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2023 पर विशेष Special on 44th World Environment Day 5th June 2023

June 4, 2023

44 वें विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2023 पर विशेष आओ पर्यावरण की रक्षा कर धरती को स्वर्ग बनाएं –

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए राजद्रोह|Indian Penal Code Section 124A Sedition

June 4, 2023

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए राजद्रोह 22 वें विधि आयोग ने राजद्रोह पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी

PreviousNext

Leave a Comment