Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

इश्क की इंतहा-जयश्री बिरमी

इश्क की इंतहा प्यार हो ही जाता हैं गर हो जुत्सजूजब इश्क हो ही जाता हैं रूबरूजब हो जानिब वफा–ए–यारक्यों …


इश्क की इंतहा

इश्क की इंतहा-जयश्री बिरमी
प्यार हो ही जाता हैं गर हो जुत्सजू
जब इश्क हो ही जाता हैं रूबरू
जब हो जानिब वफा–ए–यार
क्यों न हो दीदार–ए–यार
ये तो वो मर्ज हैं यारों
जो हैं ला– इलाज
ज्यूं ज्यूँ खाओ दवाई
बढ़ता जाता हैं मर्ज– ए–इश्क
लाइलाज मर्ज को न जरूरत हैं
तावीज और हकीम की
इसकी तो तासीर हैं वफा
दीदार–ए– यार ही काफी हैं
इश्क की इंतहा के लिए

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

बीमारी द्वारा रोगी का चयन–कहानी

February 3, 2022

बीमारी द्वारा रोगी का चयन छोटे थे तो और सभी कहानियों के साथ ये कहानी भी मां सुनाया करती थी।एक

एक बात सुनो -चन्दानीता रावत

February 3, 2022

एक बात सुनो  सुनो सुनो एक बात सुनो अन्धेर नगरी चौपट राजा की बहरे राज्य सरकार कीदिन रात एक कर

यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी

February 3, 2022

यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

February 3, 2022

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत

तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “

February 3, 2022

तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी

Leave a Comment