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इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस – भारत तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने दौड़ पड़ा है

इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस – भारत तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने दौड़ पड़ा है इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस लोकसभा में जन …


इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस – भारत तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने दौड़ पड़ा है

इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
लोकसभा में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 पारित – कारोबार के कई प्रावधान अपराध मुक्त होंगे

कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देने 42 कानूनों के 183 धाराओं में संशोधन कर उन्हें अपराध मुक्त करना मील का पत्थर साबित होगा – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर प्रतिष्ठित सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत में मानसून सत्र को शुरू हुए आज 28 जुलाई 2023 को 9 दिन हो गए और दोनों सदनों में 7 बैठकें हो चुकी है परंतु सभी हंगामे के कारण बाधित हो गई है जो अब 31 जुलाई 2023 को सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई है ऐसा नजारा हम पिछले कई सत्रों में देख रहे हैं जो साल भर में 3 बार बजट शीत और मानसून सत्र में होता है परंतु किसी ना किसी बात पर हंगामा होकर बाधित हो जाता है जो संसदीय प्रक्रिया का मूलभूत हिस्सा बन चुकाहै।हालांकि संवैधानिक रूप से संसद के दोनों सत्रों में बिल पारित हो रहे हैं, परंतु व्यवहारिक रूप से तो आम जनता जनार्दन ऐसा ही देख रही है जो बिल पारित हो रहे हैं वह बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित हो रहे हैं जो चिंतनीय और लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश नहीं है। सारी जनता जनार्दन देख रही है संसद में हंगामा, बाधित होती कार्यवाही, मूकदर्शक बने रहने को बाध्य देशवासी और जवाबदेही से बचता सत्ता पक्ष और विपक्ष! चूंकि मानसून सत्र में लोकसभा में 8 और राज्यसभा में 3 बिल ध्वनिमत से पारित हुए हैं,इनमें से एक 27 जुलाई 2023 को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2023 को ध्वनि मत से पारित किया गयाहै,जिसमें कारोबार को बढ़ावा देने 42 कानूनों की 183 धाराओं को संशोधित कर उन्हें अपराध मुक्त बनाकर इज ऑफ डूइंग बिजनेस और एज आफ लिविंग को साकार करने की कोशिश की गई है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मतलब होता है किसी भी देश में कारोबार कितनी सरलता से शुरू किया जा सकता है। विश्व बैंक हर साल डूइंग बिजनेस रिपोर्ट जारी करता है जिसमें वह 10 पैमानों पर 190 देशों की रैकिंग करता है जिसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग कहते हैं। इसलिए आज हम पीआईबी और मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, कारोबार को सुगम बनाकर तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने की ओर दौड़ पड़ा है भारत!
साथियों बात अगर हम इस बिल के लोकसभा में पारित होने की करें तो, गुरुवार को जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 को मंजूरी दे दी। निचले सदन ने संक्षिप्त चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से स्वीकृति दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही लोकसभा ने 76 पुराने और अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने के लिए निरसन एवं संशोधन विधेयक 2022 को भी मंजूरी दे दी। उल्लेखनीय है कि जन विश्वास विधेयक पारित होने से कई प्रविधानों में अब जेल की सजा नहीं होगी और कारोबारी जुर्माना देकर बचसकेंगे। कई मामलों में जुर्माना लगाने के लिए अदालती कार्यवाही की जरूरत नहीं होगी। कई बार छोटी-मोटी गलती केकारण कारोबारियों को अदालतों का चक्कर लगाना पड़ता था। बड़ी संख्या में छोटी-मोटी गड़बडि़यों को अपराध के दायरे से बाहर करने से व्यापार करना आसान होगा।कई प्रविधानों को अपराधमुक्त करने से कारोबार में आसानी होगी।सरकार ने कहा कि यह कदम जीवन और व्यापार करने में आसानी के लिए उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।जन विश्वास विधेयक पेश करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि कई प्रविधानों को अपराधमुक्त करने से कारोबार में आसानी होगी, उन्होंने कहा कि सरकार अब तक 1,486 कानूनों को निरस्त कर चुकी है और इस विधेयक को उप्री संसद की मंजूरी मिलने के बाद निरस्त कानूनों की संख्या 1,562 हो जाएगी।जन विश्वास बिल को सरकार ने पिछले साल यानी 2022 में लोकसभा में पेश किया था। बाद में इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था, इस बिल को लेकर कई मंत्रालयों और कानूनी मामलों के विभागों से चर्चा हुई थी। समिति ने सरकार से कहा था कि इसमें संशोधन करने चाहिए और कई चीजों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहिए। जिससे कोर्ट में लंबित पड़े लाखों मामलों में कमी आए,जेल की जगह वसूला जाएगा जुर्माना, संसदीय समिति ने इस बिल के जरिए 19मंत्रालयों से जुड़े करीब 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव दिया था, जिनमें वित्त मंत्रालय से लेकर सड़क परिवहन, कृषि, सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अन्य कई मंत्रालय शामिल हैं।इन मंत्रालयों के तहत आने वाले कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर जुर्माने तक सीमित कर दिया जाएगा. इससे कोर्ट-कचहरी की झंझट से मुक्ति मिलेगी, वहीं बिजनेस करना भी आसान हो जाएगा दिलचस्प है कि एक सुधार पीएमएलए में भी है, जिसका ईडी विरोध कर रहा है. पीएमएलए के प्रावधानों को डिक्रिमिनेलाइज करने का प्रस्ताव है जिसका ईडी ने यह कह कर विरोध किया कि इससे जांच एजेंसी की ताकत कम होगी। जनविश्वास बिल में कई अपराधों में सजा के बजाए जुर्माने का प्रावधान है।कोर्ट का बोझ होगा कम, जेलों में भीड़ भी ना होगी।डिक्रिमिनेलाइज करने से अदालतों का बोझ भी कम होगा और जेलों में भीड़ कम करने में भी मदद मिलेगी, जिन कानूनों में प्रावधानों को डिक्रिमिनेलाइज किया जा रहा है, उनमें पर्यावरण संरक्षण कानून, आईटी ऐक्ट, मोटर व्हीकल ऐक्ट, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट शामिल है। इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि इस बिल में कारोबार की सुगमता के लिए छोटे अपराधों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन की व्यवस्था है।
साथियों बात अगर हम इस बिल को विस्तृत रूप से जानने की करें तो, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2023 के माध्यम से, निम्नलिखित तरीके से गैर अपराधीकरण हासिल करने का प्रस्ताव है: -(i) कुछ प्रावधानों में कारावास और/या जुर्माना दोनों को हटाने का प्रस्ताव है।(ii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बरकरार रखने का प्रस्ताव है।(iii) कारावास को हटाने और कुछ प्रावधानों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है।(iv) कुछ प्रावधानों में कारावास और जुर्माने को दंड में बदलने का प्रस्ताव है।(v) अपराधों के शमन को कुछ प्रावधानों में शामिल करने का प्रस्ताव है।उपरोक्त के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, विधेयक ऐसे उपायों का प्रस्ताव करता है जैसे (ए) किए गए अपराध के अनुरूप जुर्माने और जुर्माने का व्यावहारिक संशोधन; (बी) निर्णायक अधिकारियों की स्थापना; (सी) अपीलीय प्राधिकारियों की स्थापना; और (डी) जुर्माने और दंड की मात्रा में आवधिक वृद्धियह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सजा की डिग्री और प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो।
साथियों बात अगर हम इस संशोधित विधेयक के लाभों की करें तो, संशोधन विधेयक के लाभ इस प्रकार बताए गए हैं:(1) संशोधन विधेयक आपराधिक प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने और यह सुनिश्चित करने में योगदान देगा कि नागरिक, व्यवसाय और सरकारी विभाग मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमी के लिए कारावास के डर के बिना काम करें।(2)किसी अपराध के दंडात्मक परिणाम की प्रकृति अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए। यह विधेयक किये गये अपराध/उल्लंघन की गंभीरता और निर्धारित सजा की गंभीरता के बीच संतुलन स्थापित करता है। कानून की कठोरता को खोए बिना, प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों और नागरिकों द्वारा कानून का पालन सुनिश्चित करते हैं।(3)तकनीकी/प्रक्रियात्मक गलती और गौण दोष के लिए निर्धारित आपराधिक परिणाम, न्याय वितरण प्रणाली को अवरुद्ध करते हैं और गंभीर अपराधों पर निर्णय को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। विधेयक में प्रस्तावित कुछ संशोधन, जहां भी लागू और व्यवहार्य हो, उपयुक्त प्रशासनिक न्यायनिर्णयन प्रणाली प्रस्तुत करने के लिए हैं। इससे न्याय प्रणाली पर भारी दबाव को कम करने, लंबित मामलों को कम करने और अधिक कुशल और प्रभावी न्याय वितरण में मदद मिलेगी।(4)नागरिकों और कुछ श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को अपराधमुक्त करने से उन्हें मामूली उल्लंघनों के लिए कारावास से डरे बिना जीवन जीने में मदद मिलेगी।(5) इस कानून का अधिनियमन कानूनों को तर्कसंगत बनाने, बाधाओं को दूर करने और व्यवसायों के विकास को बढ़ावा देने की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कानून विभिन्न कानूनों में भविष्य के संशोधनों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में काम करेगा। एक समान उद्देश्य के साथ विभिन्न कानूनों में समेकित संशोधन से सरकार और व्यवसायों दोनों के लिए समय और लागत की बचत होगी।
साथियों बात अगर हम मानसून सत्र 2023 में पारित विधेयकों की विस्तृत जानकारी की करें तो, हालांकि 27 जुलाई को राज्यसभा से सिनेमैटोग्राफ संशोधन बिल 2023 को पारित किया गया था और 26 जुलाई को संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2022 मंजूरी मिली थी। वहीं 25 जुलाई को राज्यसभा से संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक 2022 पारित हुआ था।साल में तीन बार संसद का सत्र चलता है। बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र. हर सत्र के बाद पिछले कई साल से हम ये सुनते आ रहे हैं कि इस सत्र की कार्यवाही का एक बड़ा हिस्सा हंगामा और अवरोध की भेंट चढ़ गया।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस – भारत तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने दौड़ पड़ा है।लोकसभा में जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2023 पारित – कारोबार के कई प्रावधान अपराध मुक्त होंगे।कारोबार की सुगमता को बढ़ावा देने 42 कानूनों के 183 धाराओं में संशोधन कर उन्हें अपराध मुक्त करना मील का पत्थर साबित होगा।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 
 गोंदिया महाराष्ट्र

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