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Jitendra_Kabir, poem

इंसान और शैतान- जितेन्द्र ‘कबीर’

इंसान और शैतान शरीर एक सा ही है,सत्य, स्नेह, शांति और भाईचारे मेंविश्वास रखने वाला‘इंसान’ हो जाता हैऔरझूठ, घृणा, कलह …


इंसान और शैतान

इंसान और शैतान- जितेन्द्र 'कबीर'

शरीर एक सा ही है,
सत्य, स्नेह, शांति और भाईचारे में
विश्वास रखने वाला
‘इंसान’ हो जाता है
और
झूठ, घृणा, कलह और झगड़े में
विश्वास रखने वाला
‘शैतान’ कहलाता है।
चस्का एक सा ही है,
ईमानदारी से कड़ी मेहनत करके
कमाई करने वाला
‘इंसान’ हो जाता है
और
बेईमानी से गलत रास्ता चुन के
घर भरने वाला
‘शैतान’ कहलाता है।
रास्ता एक सा ही है,
सेवा और परमार्थ के रास्ते पर
चलने का धैर्य रखने वाला
‘इंसान’ हो जाता है
और
लालच और स्वार्थ के रास्ते की ओर
फिसलने की मंशा रखने वाला
‘शैतान’ कहलाता है।
भाव मन का ही है,
सबका भला चाहते हुए सह-अस्तित्व
व निर्माण की भावना रखने वाला
‘इंसान’ हो जाता है
और
सिर्फ अपना भला सोचते हुए
दूसरों के विनाश की सोच रखने वाला
‘शैतान’ कहलाता है।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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