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इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष

 इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः दुनियां को वैश्विक खतरों आतंकवाद, भ्रष्टाचार …


 इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष

इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष

आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः

दुनियां को वैश्विक खतरों आतंकवाद, भ्रष्टाचार और मादक पदार्थ तस्करी को हराने के लिए एक साथ आना समय की मांग 

एक और एक ग्यारह – जब वैश्विक ताकतें आपसी सहयोग, विचार करने के लिए आपस में मिल जाए तो अपराधी ताकतों की कमर तोड़कर रख सकती हैं – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर वर्तमान कुछ वर्षों से हम मीडिया के माध्यम से देख वह सुन रहे हैं कि दुनिया के अधिकतम देश वैश्विक खतरों आतंकवाद, भ्रष्टाचार और मादक पदार्थ तस्करी से पीड़ित हैं जिसमें हर देश अपने अपने स्तर पर मुकाबला कर रहा है। ऐसा नहीं है कि यह बुराइयां केवल उस अकेले देश के बल पर की जाती है बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तरपर एक चैनल बनी होती है जिसके बल पर यह काम होते हैं जिसे अपने अपने स्तर पर मानवीय जीवो, पैसों की फंडिंग, हथियारों की तस्करी नशीले पदार्थों की तस्करी सहित अनेक प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से करके काम को अंजाम दिया जाता है। इस चैनल को तोड़ने के लिए सभी देशों को आपसी सहयोग विचारों मे सामंजस्यता रखकर रणनीति बनाकर इन वैश्विक खतरों को हराने के लिए करना जरूरी हो गया है, क्योंकि हर देश में अपने अपने कानून नियम लागू होते हैं और इसमें लिप्त अपराधी एक देश में अपराध कर दूसरे देश मे पनाह ले लेते हैं और पीड़ित देश से बचते रहते है, जिसका हम भारत में उदाहरण देखें तो, मुंबई बम कांड के आरोपी, बैंक घोटालों के आरोपी इत्यादि अनेक तरह के आरोपी आज भारत के नियमों कानूनों से बचकर विदेशों में छिपे बैठे हैं।इसीलिए ही 1923 में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन याने इंटरपोल की स्थापना की गई जिसमें आज 195 देश सदस्य हैं जो दुनिया के मोस्ट वांटेड अपराधियों के खिलाफ सात प्रकार के नोटिस जारी कर सकते हैं। प्रतिवर्ष यह विभिन्न मुद्दों पर सम्मेलन आयोजित करता है जिसमें सभी देशों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं इसी क्रम में, पिछली बार 1997 में हुई इंटरपोल की महासभा इस वर्ष 25 वर्षों के बाद 18 से 21 अक्टूबर 2022 तक यह इंटरपोल की 90 वीं महासभा नई दिल्ली भारत में शुरू है, जिसमें सभी दिग्गज देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इसमें कल हमारे पड़ोसी मुल्क के प्रतिनिधि से प्रेस नें उनके यहां शरण लिए हुए यहां के अपराधियों के बारे में पूछा गया तो थैंक्यू में जवाब दिया। हमारे माननीय पीएम महोदय ने 18 अक्टूबर 2022 को महासभा को संबोधित किया और 21 अक्टूबर 2022 को माननीय केंद्रीय गृहमंत्री समापन समारोह को संबोधित करेंगे। 

साथियों बात अगर हम इंटरपोल की करें तो भारत में चल रहे इस सम्मेलन में इसके महासचिव ने एक दिन पूर्व प्रेस में जानकारी दी कि, राज्य प्रायोजित आतंकवाद को रोकने में इंटरपोल की कोई भूमिका नहीं है। इसका ध्यान साइबर अपराधियों, मादक पदार्थ के सौदागरों और बाल शोषण करने वालों पर अंकुश लगाने पर रहता है। इंटरपोल साधारण कानूनी अपराध पर केंद्रित है जो कि दुनियाभर में होने वाले अपराध का बहुसंख्य हिस्सा है। मंगलवार से शुरू हुई, इंटरपोल महासभा की चार दिवसीय बैठक के सिलसिले में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन चार दिनों में वैश्विक अपराध और उससे साझा तरीके से निपटने पर विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन दिनों संगठित अपराध के नए आयाम बड़ी चुनौती के रूप मेंं सामने आ रहे हैं। एक तरफ अपराधियों का अंतरराष्ट्रीय फैलाव तो दूसरी तरफ साइबर क्राइम हर देश मेंं सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव डाल रहे हैं। हम बाल शोषण करने वालों, दुष्कर्मियों, हत्यारों, ड्रग डीलरों, साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं जो अरबों कमाना चाहते हैं, यही इंटरपोल का फोकस है इंटरपोल की ओर से जारी रेड नोटिस अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता। इंटरपोल अपने किसी सदस्य देश को रेड नोटिस जारी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए मजबूर नहीं करता। उन्होंने कहा कि हम मुख्य रूप से हमारे संविधान के अनुसार सामान्य कानून अपराध पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम बाल शोषण करने वालों, बलात्कारियों, हत्यारों, अरबों पैसा कमाने की चाहत रखने वाले मादक पदार्थ सौदागरों और साइबर अपराधियों के खिलाफ काम कर रहे हैं तथा इस पर इंटरपोल का मुख्य ध्यान है। दुनिया भर में ज्यादातर यही अपराध होते हैं, इसलिए इंटरपोल मौजूद है। महासचिव ने कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों के प्रतिनिधि भी महासभा में शामिल होने के लिए आए हैं। पीएम कार्यालय के मुताबिक, प्रतिनिधियों में सदस्य देशों के मंत्री, पुलिस प्रमुख, केंद्रीय ब्यूरो के प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। महासभा इंटरपोल का सर्वोच्च शासी निकाय है। इसके कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए इसकी साल में एक बार बैठक होती है। बैठक में वित्तीय अपराधों और भ्रष्टाचार के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हो रही है। 

साथियों बात अगर हम इस सम्मेलन में माननीय पीएम के 18 अक्टूबर 2022 को संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार, पीएम नें भ्रष्टाचार के खतरों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों ने कई देशों के नागरिकों के कल्याण को नुकसान पहुंचाया है।भ्रष्ट लोग दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपराध की आय को रखने का एक तरीका ढूंढ लेते हैं। यह पैसा उस देश के नागरिकों का है, जहां से उन्हें लिया गया है। अक्सर, यह दुनिया के कुछ सबसे गरीब लोगों से लिया गया है। इसके अलावा, पैसा कई हानिकारक कामों में लगाया जाता है। उन्होंने आतंकवाद, भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध शिकार और संगठित अपराध जैसे कई उभरते हानिकारक वैश्वीकृत खतरों के बारे में याद दिलाया। उन्होंने कहा, इन खतरों के परिवर्तन की गति पहले की तुलना में तेज है। जब खतरे वैश्विक हों, तो प्रतिक्रिया सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं हो सकती! समय आ गया है कि दुनिया इन खतरों को हराने के लिए एक साथ आए। अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की बुराइयों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि भारत कई दशकों से इसका मुकाबला कर रहा है, इससे भी पहले कि जब दुनिया ने इसकी पहचान की। उन्होंने कहा, हम सुरक्षा और संरक्षा की कीमत जानते हैं। हमारे हजारों लोगों ने इस लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि आतंकवाद अब केवल भौतिक रूप में नहीं लड़ा जाता है, बल्कि ऑनलाइन कट्टरता और साइबर खतरों के माध्यम से तेजी से फैल रहा है। एक हमले को अंजाम दिया जा सकता है अथवा सिस्टम को केवल एक बटन के क्लिक से ध्वस्त कियाजा सकता है।अंतर्राष्ट्रीय रणनीतियों को और विकसित करने की आवश्यकता को दोहराते हुए, उन्होंने कहा, प्रत्येक राष्ट्र उनके खिलाफ रणनीतियों पर काम कर रहा है। लेकिन हम अपनी सीमाओं के भीतर जो करते हैं, वह अब काफी नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि शीघ्र पता लगाने और चेतावनी प्रणाली की स्थापना, परिवहन सेवाओं की सुरक्षा, संचार के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, तकनीकी और प्रौद्योगिकीय सहायता, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, और विभिन्न अन्य चीजों को एक नए स्तर पर ले जाया जाए। 

आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः। देवा नोयथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवेदिवे॥

अर्थ – हमारे पास चारों ओर से ऐंसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रगति को न रोकने वाले और सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिए तत्पर रहें। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनिया को वैश्विक खतरों आतंकवाद भ्रष्टाचार और मादक पदार्थ तस्करी से हराने के लिए एक साथ आना समय की मांग है।एक और एक ग्यारह-जब वैश्विक ताकतें आपसी सहयोग विचार करने के लिए मिल जाए तो अपराधी ताकतों की कमर तोड़कर रख सकती है।

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Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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