Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत …


 आहत

आहत - सुधीर श्रीवास्तव
 कितना आसान है 

किसी को आहत करना,

जले पर नमक छिड़कना ।

पर जरा सोचिए

कोई आपको यूँ आहत करेगा

तब कैसा लगेगा?

मगर हम सब आदत से लाचार हैं,

अपने क्षणिक मनोरंजन, खुशहाली

या उदंडतावश ऐसा जब तब करते ही हैं,

सामने वाले की पीड़ा बढ़ाते हैं

उसकी बेबसी का मजाक बनाते हैं,

औरों की नजरों में भी उसे

हँसी का पात्र बनाते हैं,

अपने को बड़ा होशियार समझते हैं।

मगर जब ऐसा हमारे साथ होता है

तब हम किंकर्तव्यविमूढ़ से

होकर रह जाते हैं,

आहत होने का दर्द वास्तव में

तब ही समझ पाते हैं,

लोगों की मानसिकता पर 

सवाल उठाते हैं,

समझ पर ऊँगलियाँ उठाते हैं,

आहत होने और करने का फर्क

महसूस कर पाते हैं।

● सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा, उ.प्र.
  8115295921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है

March 4, 2023

भावनानी के भाव नम्र बनके रहो हर खुशहाल पल तुम्हारा है बुजुर्गों ने कहा यह जीवन का सहारा है सामने

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

हे परमपिता परमेश्वर

March 4, 2023

भावनानी के भाव हे परमपिता परमेश्वर आपके द्वारा दिए इस जीवन में इन मुस्कुराहटों का हम पर एहसान है हर

हे परवरदिगार मेरे मालिक

March 4, 2023

 भावनानी के भाव हे परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं  उसने कहा बक्ष दूंगा  मैंने कहा परेशान हूं

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment