Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता …


आम जनता का नसीब

आम जनता के लिए
धर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतू
प्रक्रिया अलग है
और ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग,

जनता के लिए पूजा विधि अलग है
और ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग,

जनता को दिया जाने वाला
ईश्वर का प्रसाद अलग है
और ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग,

ईश्वर के दरबार में दोनों का
चढ़ावा भी है काफी अलग-अलग,

फिर कैसे आम जनता बराबरी की सोच ले
जब दुनिया तो दुनिया
ईश्वर के सामने भी है उनकी हैसियत अलग,

उसी की वजह से भगदड़ में हर बार
कुचले जाने का नसीब है आम जनता का
लेकिन सुरक्षित घर लौट आने का
‘वी.आई.पी.’ का नसीब है अलग।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता-हमें लोकतंत्र न्याय बंधुत्व की सामूहिक विरासत मिली/Loktantra par kavita

October 22, 2022

कविता-हमें लोकतंत्र न्याय बंधुत्व की सामूहिक विरासत मिली हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हमारी किस्मत खुली अहिंसात्मक सोच सच्चे उपयोग की

प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां/Deepawali par kavita

October 22, 2022

 कविता -प्रकाश पर्व दीपावली की बधाईयां प्रकाश पर्व दीपावली की बधाई  पारंपरिक हर्ष और उत्साह लेकर आई  राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने

इस धरा पर…. ” (कविता…)

October 19, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात “इस धरा पर…. ” (कविता…) सूरज की पहली किरण से,जैसे जगमग होता ये संसार।दीपों

ये ना समझो पाठकों

October 19, 2022

अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसकावही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जबतब कलम का हर

धनतेरस के दिन मैंने अपनी मां को खोया

October 19, 2022

धनतेरस 2020 के दिन मैं अपनी मां के साथ बैठा था अचानक उसे साइलेंट अटैक आया और मेरी नजरों के

पता नहीं क्यों

October 17, 2022

कविता –पता नहीं क्यों मुझे घर का कोइ एक सख्श याद नहीं आता। मुझे याद आता है वो भाव, वो

PreviousNext

Leave a Comment