Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी …


आज फिर बसंत आई हैं

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी
पतझड़ की छोड़ चुन्नर
आज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैं
हैं बरखा ऋतुओं की रानी
बसंत भी कहां पीछे रहने वाली हैं
गया सूखे पत्तों का मौसम
आज नौयौवन की पीली घाटा छाई हैं
ओढ़े चुन्नार पीली प्रकृति लहराई हैं
पीली हैं बसंत और पीली हैं सरसों फूल
अब तो छाई हैं यौवन पे बहार
खूब खिली फुलवारी हैं
ऋतु ने किया हैं नया सिंगार
आज फिर दुल्हन बन के आई हैं
जच रहा हैं ये मौसम युवा दिलों को
प्यार की हलचल फिर आई हैं
पाई हैं हरकतें दिलों ने
मौसम को दी बधाई हैं
आओ दिल के करें अरमां पूरे
दी हैं दिल ने दिल को बधाई हैं
आज फिर बसंत आई हैं
लाई हैं बसंती मौसम देखो
अबकी फिर बसंत आई हैं

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

साहित्य राष्ट्र की महानता

July 6, 2023

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार

भारतीय नारी सब पर भारी- Kavita

July 6, 2023

भावनानी के भाव भारतीय नारी सब पर भारी पुरुषों से कम नहीं है आज की भारतीय नारी व्यवसाय हो या

नारी पर कविता | Naari par kavita

July 2, 2023

भावनानी के भाव  नारी पर कविता  नारी ऐसी होती है जो सभी रिश्तो को एक धागे में पिरोती हैमां बहन

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती

July 2, 2023

मुझे कहॉं लेखन विद्या आती मुझे कहॉं सच लेखन विद्या आतीमैं तो बस खुद के लिए लिख जातीखुद को मिले

मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं

July 2, 2023

भावनानी के भाव मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं   मुस्कान में पराए भी अपने होते हैं अटके काम

भारतीय संस्कार पर कविता

July 2, 2023

भावनानी के भाव भारतीय संस्कार पर कविता भारतीय संस्कार हमारे अनमोल मोती है प्रतितिदिन मातापिता के पावन चरणस्पर्श से शुरुआत

PreviousNext

Leave a Comment