Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

आज का नेता | aaj ka neta

आज का नेता नेताजी का पेट निरालाभरे इसे पैसों की मालाफर्क ना इसको पड़े कभीचाहे गिरे ओस या पाला।। कुर्सी-कुर्सी …


आज का नेता

नेताजी का पेट निराला
भरे इसे पैसों की माला
फर्क ना इसको पड़े कभी
चाहे गिरे ओस या पाला।।

कुर्सी-कुर्सी रटे मन में जाला
राशन में भी करे घोटाला
आला रे आला देखो आला
चुनाव प्रसार करने पहन ये माला।।

कोई कहे कामचोर ये ….
कोई कहे पचे ना इसे ये गाला
कोई कहे स्वच्छ हो ये जाला
कोसे इसे हर वक्त ईमान वाला।।

फिर भी फर्क पड़े ना , ये मतवाला।।२।।

नेता तो हवाई यात्रा कर जाते
ऊपर से बाढ़ सूखे का दौरा कर जताते
तनिक जरा उस जगह उतर के देखो
बाढ़ सूखे से त्रस्त प्राणी संग बतिया बैठो।।

कोई नहीं इस जग में अपना पराया
मतलबी दुनिया यही तो समझाया
पैंसों की ही फैली हर ओर माया
प्रेम नहीं चाही आज सबने सिर्फ काया।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र

दर्द – ए शायरा


Related Posts

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

विश्व परिवार दिवस 15 मई 2020 पर विशेष कविता

May 14, 2022

 विश्व परिवार दिवस 15 मई 2020 पर विशेष  कविता प्रथम गुरु है माता पिता जिस परिवार में माता-पिता हंसते हैं 

टूट रहे परिवार !

May 14, 2022

टूट रहे परिवार ! बदल गए परिवार के, अब तो सौरभ भाव ! रिश्ते-नातों में नहीं, पहले जैसे चाव !!

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर

May 11, 2022

कविता-डिजिटल युग का नया डॉक्टर चिंतक कवि, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है

कविता-उम्मीद

May 10, 2022

 उम्मीद  उदास रातों में उम्मीद की शमां जलाओ यारो  सन्नाटे की दीवारों पर खुशियां सजाओ यारो  फिर ये ख़ामोशी भी

PreviousNext

Leave a Comment