Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
आखा बीज | aakha beej

kanchan chauhan, poem

आखा बीज | aakha beej

आखा बीज भारत में कई राज्य हैं, उनमें राजस्थान है एक। राजस्थान में शहर बीकानेर, कहते हैं जिस को बीकाणा। …


आखा बीज

भारत में कई राज्य हैं,
उनमें राजस्थान है एक।
राजस्थान में शहर बीकानेर,
कहते हैं जिस को बीकाणा।
राव बीका जी ने नींव लगाई,
आंखा बीज का दिन था वो।
आखा बीज का शुभ दिनआज भी,
मिल जुल कर सभी मनाते हैं।
लोग उड़ाते पतंग हैं इस दिन,
बड़ा ही उल्लास दिखाते हैं।
ये काटा,वो काटा बोले कोई,
या फिर ढील दे, ढील दे,
यही, दिन भर शोर मचाते हैं ।

रंग बिरंगी पतंगें दिन भर,
आकाश में छाई रहती हैं।
लहराती ये पतंगें दिन भर,
सब का मन हर्षातीं हैं।
हंसी खुशी के खेल में लेकिन,
इक समस्या बड़ी भारी है।
चाइनीज मांझा घायल कर दे,
आकाश में उड़ते परींदों को,
कभी -कभी यह जान भी ले लें,
राह चलते राहगीरों की।
हाथ जोड़ कर विनती सब से,
खेल को खेल ही रहने दें।
हार जीत के चक्कर में,
रंग में भंग ना पड़ने दें।

पतंग उड़ाना बड़ा सुखद है,
इसका आनंद उठाना है,
चाइनीज मांझा नहीं लगाना,
इस पर्व को सुरक्षित मनाना है।
आखा बीज का शुभ दिन,
हम सबको मिलकर मनाना है।
हर्षोल्लास से ये दिवस मनाकर,
बीकानेर का मान बढ़ाना है।

About author

कंचन चौहान,बीकानेर

Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment