Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

आओ भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाएं

 आओ भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाएं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी भारतीय भाषाओं का वैज्ञानिक और तकनीकी संरक्षण जरूरी- …


 आओ भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाएं

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

भारतीय भाषाओं का वैज्ञानिक और तकनीकी संरक्षण जरूरी- भाषा यह संचार के एक माध्यम से कहीं अधिक एक अदृश्य धागा है जो हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ता है 

भारतीय भाषाएं भारत रूपी माला में पिरोए मोती हैं जिसके प्रकाश से भारत आज विश्व में जगमगा रहा है- एड किशन भावनानी

गोंदिया- भारत देश संस्कृति, भाषाओं, उपनिषद साहित्य से पिरोई ऐसी ख़ूबसूरत माला है जो वैश्विक रूप से अनमोल है इस भारतीय विरासत को देखने हज़ारों की संख्या में सैलानी भारत आते हैं और यह भारतीय ख़ूबसूरती विश्व प्रसिद्ध हैं। साथियों इस भारत रूपी माला में पिरोए मोतियों में से भाषा एक अनमोल मोती है। 

साथियों बात अगर हम भाषा की करें तो,भाषा, मुख से उच्चारित होने वाले शब्दों और वाक्यों आदि का वह समूह है,जिनके द्वारा मन की बात बताई जाती है।किसी भाषा की सभी ध्वनियों के प्रतिनिधि स्वर एक व्यवस्था में मिलकर एक सम्पूर्ण भाषा की अवधारणा बनाते हैं।सामान्यतः भाषा को वैचारिक आदान-प्रदान का माध्यम कहा जा सकता है। 

साथियों बात अगर हम भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची की करें तो,इसमें 22 भाषाएँ तो आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं ही पर यदि सब गिनी जाएँ तो हमारे देश में 30 से अधिक भाषाओं के साथ 100 से अधिक क्षेत्रीय भाषाएँ भी हैं।अनुसूचित भाषाएं 1) असमिया, (2) बंगला, (3) बोड़ो, (4) डोगरी, (5) गुजराती, (6) हिंदी, (7) कन्नड़, (8) कश्मीरी, (9) कोंकणी, (10) मैथिली, (11) मलयालम, (12) मणिपुरी, (13) मराठी, (14) नेपाली, (15) उड़िया, (16) पंजाबी, (17) संस्कृत, (18) संथाली, (19) सिंधी, (20) तमिल, (21) तेलुगू और (22) उर्दू।

साथियों बात अगर हम हिंदी भाषा की करें तो,यह विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।जो हमारे पारम्‍परिक ज्ञान, प्राचीन सभ्‍यता औरआधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है। हिंदी भारत संघ कीराजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की भी प्रमुख राजभाषा है।संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी का एकविशेष स्थान है।

साथियों बात अगर हम सभी अनुसूचित और गैर-अनुसूचित भाषाओं की करें तो यह भारतीयता की ख़ूबसूरती है कि,इतनी भाषाओं के बीच भारत अपनी ख़ूबसूरती बिखेर रहा है।यह भारतवर्ष के लिए आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्योंकि मुख से उच्चारित भाषा के आदान-प्रदान से ही ज्ञान की ज्योत प्रजवलित होती हैं।हमें इन सभी भाषाओं, जो अनुसूचित नहीं भी हैं,उसका संरक्षण करना जरूरी है। 

साथियों बात अगर हम अंग्रेजी भाषा की करें तो आज के आधुनिक डिजिटलाइजेशन युग में अंग्रेजी बोलचाल का फ़ैशन सा हो गया है,जो मातृभाषा में बात करता है उसे हम पुराने ज़माने की सोच का दर्ज़ा देते हैं।हम अपने सामाजिक भाषाओंं की विलुप्तता को प्रोत्साहन देने का काम करते हैं जिसे रोकना होगा।क्योंकि हमारे भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश सहित अनेक प्रशानिक व्यक्तित्व की प्राथमिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में ही हुई है। इसलिए भारतीय भाषाएं भारत रूपी माला में पिरोए वह मोती हैं जिसके प्रकाश से ही आज भारत विश्व में जगमगा रहा है।इसलिए भारतीय भाषाओं का वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर संरक्षण जरूरी है। 

साथियों बात अगर हम भारतीय भाषाओं के संरक्षण में माननीय उपराष्ट्रपति के एक भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर वर्चुअल संबोधन की करें तो पीआईबी की प्रेसविज्ञप्ति के अनुसा उन्होंने ने इसका उल्लेख किया कि भाषा न केवल हमारी पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे आत्मविश्वास को भी बढ़ाती है।इसके लिए, उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपनी मातृभाषा में होने की जरूरत को रेखांकित किया,जिसकी परिकल्पना राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई है और आखिरकार उच्चतर व तकनीकी शिक्षा तक इसे विस्तारित किया जाना है।उन्होंने व्यापक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली में भी सुधार का सुझाव दिया। और कहा,यह आत्मविश्वास आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा और धीरे-धीरे आत्मानिर्भर भारत की राह बनाएगा।भारतीय भाषाओंके इस्तेमाल को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए कुछ उपायों की सूची बनाते हुए, उन्होंने प्रशासन में स्थानीय भाषाओं के उपयोग, बच्चों के बीच पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने और शहरों व गांवों में पुस्तकालयों की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।उन्होंने विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यिक कार्यों का अनुवाद करने के लिए और अधिक पहल करने का भी आह्वाहन किया। उन्‍होंने इस बात की इच्छा व्यक्त की कि बच्चों को खेल और गतिविधियों के जरिए सरल तरीके से भाषा की बारीकियां सिखाया जाएं।भाषा की जीवंत संस्कृति को बनाए रखने के लिए एक जन आंदोलन की जरूरत है।उन्होंने इस बात पर भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि सांस्कृतिक और भाषाई पुनर्जागरण को लोगों का अधिक से अधिक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि सांस्कृतिक और भाषाई पुनर्जागरण को लोगों का अधिक से अधिक समर्थन मिल रहा है।भाषा और संस्कृति के बीच गहरे संबंध को देखते हुए,उन्होंने युवाओं को अपनी जड़ों से फिर से जुड़ने के लिए भाषा का इस्तेमाल करने की सलाह दी। और कहा,भाषा संचार के एक माध्यम से कहीं अधिक है,यह अदृश्य धागा है जो हमारे अतीत,वर्तमान और भविष्य को जोड़ता है।मातृभाषा को महत्व देने का मतलब अन्य भाषाओं की उपेक्षा नहीं है। उन्होंने इस धारणा को ख़ारिज किया कि कोई व्यक्ति अंग्रेजी में अध्ययन करने पर ही जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उन्होंने अपना और राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश का उदाहरण दिया कि,इन चारों ने अपनी-अपनी मातृभाषा में विद्यालय की शिक्षा प्राप्त की और इसके बावजूद बहुत उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन हुए।उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को अधिक से अधिक भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करें, इसकी शुरुआत अपनी मातृभाषा में एक मजबूत नींव के साथ करें।लोगों से अपनी मातृभाषा को बोलने में गर्व महसूस करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल में हीनता की भावना नहीं होनी चाहिए।आज भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और उन्हें बदलते समय के अनुकूल बनाने के लिए अभिनव तरीकों के साथ आगे आने का आह्वान किया,यह देखते हुए कि भाषा एक स्थिरअवधारणा नहीं है,उन्होंने भाषाओं को समृद्ध करने के लिए एक गतिशील और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। 

अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, आओ भारतीय भाषाओं को विलुप्त होने से बचाएं,भारतीय भाषाओं का वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर संरक्षण करना जरूरी है।क्योंकि भाषा यह संचार के एक माध्यम से कहीं अधिक अदृश्य धागा है जो हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ता है और भारतीय भाषाएं भारत की माला में पिरोए मोती हैं जिसके प्रकाश से भारत आज विश्व में जगमग आ रहा है। 

-संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं

September 17, 2022

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं अपने आपको सहज़ता से जोड़ो सहज़ता में संस्कार उगते हैं सौद्राहता प्रेम वात्सल्य पनपता है

रक्तदान अमृत महोत्सव 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2022

September 17, 2022

 रक्तदान अमृत महोत्सव 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2022  आओ रक्तदान अमृत महोत्सव मेगा अभियान में भागीदारी से रक्तदान कर

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया टेबल के नीचे पैसे लेकर परिवार बढ़ाया कितना भी समेट

मिशन चीता

September 17, 2022

मिशन चीता आओ वन्य जीव प्राणीयों को विलुप्तता से बचाएं 1952 से विलुप्त घोषित चीतों की प्रजाति को पुनर्जीवन के

स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये।

September 17, 2022

स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये। सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ हाशिए पर स्थित

ओजोन परत की बहाली के लिए विश्व स्तर पर कार्य आवश्यक हैं।

September 17, 2022

(16 सितंबर – विश्व ओजोन दिवस) ओजोन परत की बहाली के लिए विश्व स्तर पर कार्य आवश्यक हैं। ओजोन एक

Leave a Comment