Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्धि और बाल केंद्रित बनाने एक नई छलांग

जादुई पिटारा अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्धि और बाल केंद्रित बनाने एक नई छलांग स्थानीय …


जादुई पिटारा

अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्धि और बाल केंद्रित बनाने एक नई छलांग

अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्धि और बाल केंद्रित बनाने एक नई छलांग

स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ, रेगुलर शिक्षा सहित 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध जादुई पिटारा मील का पत्थर साबित होगा – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सदियों से भारतीय बौद्धिक क्षमता का लोहा दुनिया मानती आई है, जिसे समय-समय पर सरकारें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से शेप देती आई है परंतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी2020) में जिस तरह की दूरगामी नीतियों को सम्मिलित किया गया है,उससे दूरगामी बहुमूल्य सकारात्मक परिणाम हमें कुछ वर्षों से देखना शुरू हो जाएगा,क्योंकि इस एनसीपी को वर्तमान और भविष्य में आने वाली परिस्थितियों को हाइपोथेटिक करके बनाया गया है, जो मेरा मानना है कि हमारे विज़न 2047 के मज़बूत आधारों में से एक साबित हो सकता है। इस एनईपी-2020 के बल पर आने वाले वर्षोंमें कौशलता विकास में बहुत बड़ी मात्रा में हमारे नागरिक निपुण हो जाएंगे और वह नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि देने वाले बन जाएंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है। जिसके सटीक होने की पूरी संभावना है। चूंकि आज की स्थिति में बेरोजगारी इतनी भयंकर है, जिसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि एक राज्य में 15 मार्च 2023 को होने वाली परीक्षा में पटवारी सहित अन्य पदों के लिए राज्य में कर्मचारी चयन मंडल द्वारा कुल 9073 पदों को भरा जाना है, जिसमें 6755 पद पटवारी के हैं, जिसके लिए एक टीवी चैनल पर बताया गया करीब 12 लाख़ आवेदनों तो एक मीडिया ग्रुप के 13 फरवरी की रिपोर्ट में सभी पदों के लिए 22 लाख़ आवेदनों की बात कही गई है, उन आवेदनों को 23 जनवरी 2023 को बंद किया गया था जिसमें पटवारी पोस्ट के लिए आवेदन करने वाले पीएचडी एमबीए बैचलर इन टेक्नोलॉजी जैसे शिक्षित छात्रों की संख्या लाखों में है जो घंटी बजाओ कार्यक्रम में दिखाया गया है, जिसे देखकर मैं अवाक रह गया हूं!! मेरा मानना है कि इस स्थिति को शायद एनईपी नीति 2020 के माध्यमसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सटीक योजनाएं बनाई गई है, जिसके दूरगामी परिणाम हमें आगे के वर्षों में देखने को मिल सकते हैं। इसकी नींव 3 से 8 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए तैयार की गई खेल आधारित शिक्षा अध्ययन सामग्री है, जिसका शुभारंभ माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 20 फ़रवरी 2023 को किया है,इसलिए आज हम पीआईबी में आई जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,जादुई पिटारा जो अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्ध और बाल केंद्रित बनाने एक नई शालांग है।
साथियों बात अगर हम जादुई पिटारा, शिक्षा अध्ययन सामग्री की करें तो इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैएनसीएफ-एफएस का प्रमुख परिवर्तनकारी पहलू, खेलते हुए सीखें’।बुनियादी चरण-उम्र 3-8 साल,खेलते हुए सर्वोत्तम और प्रभावकारी ढंग से सीखें न्यूरोसाइंस से लेकर शिक्षा तक विविध क्षेत्रों में अनुसंधान, कक्षा 1 और 2 पर भी लागू (उम्र 6-8 साल) – बड़ा बदलाव- बच्चे खेलते, मजे करते हुए सीखेंगे, और एफएलएन संभव हो पाएगा।
5 क्षेत्रों में सीखना और विकास, शारीरिक विकास, सामाजिक भावनात्मक व नैतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा एवं साक्षरता विकास, सुरुचिपूर्ण एवं सांस्कृतिक विकास, सीखने की सकारात्मक आदतों को इस चरण में विकास के एक अन्य क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।खेलना सुनिश्चित करने के लिए,केवल किताबें ही नहीं,बल्कि सीखने और सिखाने के लिए अनगिनतसंसाधनों का उपयोग किया जाना है।खिलौने, पहेलियां कठपुतलियां।पोस्टर,फ्लैश कार्डवर्क शीट्स और आकर्षक किताबें स्थानीय परिवेश, संदर्भ और समुदाय।आम जीवन, स्थानीय संदर्भ और भारत में निहित जादुई पिटारामें ये सभीसमाहित हैं। विभिन्न संसाधनविविधता और स्थानीय संसाधनों को समायोजित करने कालचीलापनआमोद-प्रमोद इत्यादि।
साथियों बात अगर हम उद्घाटन समारोह में माननीय शिक्षा मंत्री के संबोधन की करें तो उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्लेबुक, खिलौने, पहेलियां, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, कहानी की किताबें,वर्कशीट के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ और भाषाओं को मिलाकर बना ‘जादुई पिटारा जिज्ञासा को बढ़ाने और लोगों की विविध आवश्यकताओं को समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा के तहत विकसित जादुई पिटारा 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। यह सीखने-सिखाने के माहौल को समृद्ध करने और अमृत पीढ़ी के लिए इसे और अधिक बालकेंद्रित, जीवंत और आनंदमय बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है जैसा कि एनईपी 2020 में परिकल्पना की गई है। सीखने के परिदृश्य को और अधिक जीवंत बनाने के लिए आज का यह दिन एक ऐतिहासिक दिन है। पीएम के विज़न के अनुरूप 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षण-अध्‍यापन सामग्री जादुई पिटारा आज लॉन्च की गई है।एनईपी – 2020 में 5+3+3+4 पाठ्यक्रम शैक्षणिक संरचना की परिकल्पना की गई है। शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने प्रत्येक चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा विकसित करने के लिए प्रो. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय संचालन समिति का गठन किया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा बुनियादी चरण (एफएस) के लिए 20 अक्टूबर, 2022 को एनसीएफ की शुरुआत की गई थी और पाठ्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, एनसीईआरटी ने अध्‍ययन शिक्षण सामग्री (एसटीएम) विकसित और एकत्र की है। तदनुसार, बुनियादी चरण के लिए अध्‍ययन-शिक्षण सामग्री की जादुई पिटारा की अवधारणा का उपयोग करते हुए आज शुभारंभ किया गया। शिक्षकों व छात्रों के एनईपी और एनसीएफ -एफएस को व्‍यवहार में लाने की उम्मीद है। उन्होंने एक राष्ट्रीय विचार मंच (थिंक-टैंक) के रूप में एनसीईआरटी से आग्रह किया कि सभी भारतीय भाषाओं में ‘जादुई पिटारा’ में सम्मिलित सामग्री का अनुवाद करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए और इसकी पहुंच का विस्तार करने के साथ-साथ इसे सभी एससीईआरटी को बचपन में देखभाल और हमारे देश के शिक्षा परिदृश्य में बदलाव के लिए उपलब्ध कराना चाहिए। इन संसाधनों को डिजिटल रूप से दीक्षा प्लेटफॉर्म-पोर्टल और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी बुनियादी शिक्षण सामग्री मातृभाषा में होनी चाहिए।एनसीईआरटी ने प्रशिक्षकों की हैंडबुक मैपिंग से लेकर फाउंडेशनल स्टेज पर शिक्षकों के भविष्य के प्रशिक्षण के लिए एनसीएफ-एफएस के लक्ष्यों के लिए पंच कोषीय विकास और पाठ्यक्रम विकसित किया है।अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि जादुई पिटारा,अमृत पीढ़ी के लिए सीखने सिखाने के माहौल को समृद्ध और बाल केंद्रित बनाने एक नई छलांग है।स्थानीय संस्कृति, सामाजिक संदर्भ, रेगुलर शिक्षा से 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध जादुई पिटारा मील का पत्थर साबित होगा।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 

Related Posts

कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है covid crisis is not over yet

December 22, 2022

कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है  दुनिया के कई देशों में फ़िर तेजी से फैल रहे विस्फोटक कोविड-19 वेरिएंट

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल

December 22, 2022

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल कोई आप से पूछे कि रिलेशनशिप में सब से

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति

December 22, 2022

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति सरपंच पति प्रथा ने महिलाओ को पहले जहा थी वही लाकर खड़ा कर

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी

December 22, 2022

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) 2022 यह रिपोर्ट राज्य और

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है?

December 20, 2022

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है? सरकार से पर्याप्त धन प्राप्त करने वाले कई निकायों के

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले।

December 20, 2022

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले। जब तक देश की परीक्षा संस्कृति से इस

Leave a Comment