Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mohit Tripathi, poem

अब न स्वांग रचो| Ab na swang racho

अब न स्वांग रचो| Ab na swang racho  जो सच है वह सच है खुलकर इसको स्वीकार करो ,झूठ का …


अब न स्वांग रचो| Ab na swang racho 

जो सच है वह सच है
खुलकर इसको स्वीकार करो ,
झूठ का पर्दा उठ चुका है
अब न स्वांग रचो।

वर्षों झेली जो गुलामी
उस गुलामी के चिन्हों से,
भावी पीढ़ी के जन-मन को
मुक्त करो, आज़ाद करो
अब न स्वांग रचो।

क्यों बनते हमदर्द उनके
जिन्होंने देश को दर्द दिया।
बहनों का सुहाग उजाड़ा
माताओं के कई लाल
उनसे छीन लिया।

जिस विभाजन की पीड़ा को
देश अब भी भूल न पाया है
क्या ऐसी वह मजबूरी है ?
जो राष्ट्र तोड़ने वाली ताकतों से
तुम्हारा अटूट नाता है।

झूठ का पर्दा उठ चुका है
अब न स्वांग रचो।

बम बारूदों विस्फोटों की
गूँज अभी भी ज़िंदा है,
दंगों में मरते कटते इंसानों की
चीत्कार अभी भी ज़िंदा है।

तुम आतंक परस्तों के
माँ-बाप बने क्यों फिरते हो ?
बतलाओ क्या मजबूरी है जो
भारत माँ की जय
कहने में डरते हो ?

About author 

संक्षिप्त परिचय: कवि, लेखक, शिक्षक एवं समाजसेवी इंजी. मोहित त्रिपाठी। 27 फरवरी 1995 को वाराणसी में जन्म। बी.टेक एवं एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। मोहित त्रिपाठी वाराणसी में एक शिक्षण एवं समाज सेवी संस्था विज़डम इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सीलेंस के संस्थापक और निदेशक हैं मोहित अध्ययन-अध्यापन के साथ साहित्यिक एवं सम-सामयिक लेखन में भी सक्रिय हैं। हिंदी साहित्य में गहरी रूचि। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में 100 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित। सम्प्रति: वाराणसी में निवास। कई अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित। अनेक संस्थाओं एवं संगठनों से जुड़े रहे हैं।  

About author

मोहित त्रिपाठी
संक्षिप्त परिचय: कवि, लेखक, शिक्षक एवं समाजसेवी इंजी. मोहित त्रिपाठी। 27 फरवरी 1995 को वाराणसी में जन्म। बी.टेक एवं एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। मोहित त्रिपाठी वाराणसी में एक शिक्षण एवं समाज सेवी संस्था विज़डम इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सीलेंस के संस्थापक और निदेशक हैं मोहित अध्ययन-अध्यापन के साथ साहित्यिक एवं सम-सामयिक लेखन में भी सक्रिय हैं। हिंदी साहित्य में गहरी रूचि। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में 100 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित। सम्प्रति: वाराणसी में निवास। कई अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित। अनेक संस्थाओं एवं संगठनों से जुड़े रहे हैं।
 संपर्क सूत्र–mohittripathivashisth27@gmail.com
पता: सरोज भवन डी 36/123 अगस्त्यकुंड, दशाश्वमेध, वाराणसी, उत्तर प्रदेश-221001

Related Posts

माँ का समर्पण- अनीता शर्मा

December 23, 2021

माँ का समर्पण माँ का समर्पण उसे निभाती एक स्त्री । माँ शब्द अपने में सशक्त,सबको माफ कर चुप रहती।

जीवन भी गणित- सुधीर श्रीवास्तव

December 23, 2021

राष्ट्रीय गणित दिवस (22 दिसंबर) पर विशेष जीवन भी गणित हम और हमारे जीवन का हर पल किसी गणित से

प्रणय की धारा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

प्रणय की धारा मन का स्रोत बहुत है गहरा ,मन से निकली प्रणयकी धारा ,मन और धन का खेल निराला,

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

Leave a Comment