Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Bhawna_thaker

“अब तो सोच बदलो”

“अब तो सोच बदलो” भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर आज हम 21वीं सदी की दहलीज़ पर खड़े है औरतों ने अपनी …


“अब तो सोच बदलो”

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

आज हम 21वीं सदी की दहलीज़ पर खड़े है औरतों ने अपनी अठारहवीं सदी वाली छवि बदलकर रख दी है, हर क्षेत्र में नारी एक सक्षम योद्धा सी अपना परचम लहरा रही है और परिवार का संबल बनकर खड़ी है, फिर भी कुछ लोगों की मानसिकता नहीं बदली। चाहे कितनी ही सदियाँ बदल जाए कामकाजी और नाईट ड्यूटी करने वाली स्त्रियों के प्रति कुछ अवधारणा कभी नहीं बदलेगी। घर से बाहर निकलकर काम करने वाली औरतों को एक अनमनी नज़रों से ही क्यूँ देखता है समाज का एक खास वर्ग? चंद हल्की मानसिकता वाली औरतों को नज़र में रखते रात को बाहर काम करने वाली हर महिला को आप गलत नहीं ठहरा सकते। मुखर महिला यानी बदचलन, किसी मर्द के साथ हंस कर बात करने पर महिला को शक कि नज़रों से ही देखा जाता है। इमरजेन्सी में कोई सहकर्मी घर छोड़ने आता है तो कानाफ़ूसी होती है। और खास कर जब रात को कोई महिला अपने काम से बाहर जाती है, या काम से लौटती है उसके लिए लोगों की मानसिकता कहीं न कहीं गलत ही रहती है। आवारा, बदचलन और न जानें क्या-क्या। और देखने वाली बात ये है की औरत के लिए ऐसी गलत और गंदी मानसिकता ज़्यादातर औरतों की ही होती है।
यही सारी बातें मर्दों के लिये जायज़ है ऐसी दोहरी मानसिकता क्यूँ? मर्द नाईट ड्यूटी करता है तो उसके लिए क्यूँ को टिप्पणी नहीं होती? आज लड़कीयाँ कहाँ से कहाँ पहुँच गई वो अपनी हिफ़ाज़त खुद करना जानती है, मर्द के जितनी ही सक्षम है। आज प्राईवेट कंपनी, आई टी कंपनी वालों का डायरेक्ट विदेशों की कंपनी के साथ व्यवहार होता है, तो रात और दिन के समय को एडजस्ट करने के लिए कंपलसरी नाईट ड्यूटी सबको करनी पडती है। पर कुछ लोगों को ये नहीं पता कि बड़े शहरों में बड़ी कंपनी वाले पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कैब और सुरक्षाकर्मी सहित की व्यवस्था महिलाओं के लिए रखते है। घर पहुँचने पर कंपनी से कंन्फ़र्मेशन फोन आता है कि ठीक से पहुँच गए कि नहीं। साथ ही साथ कंपनियां नाईट ड्यूटी की सेलरी भी अधिक देती है, तो क्यूँ कोई औरत महज़ समाज के डर से हिचकिचाते काम से कन्नी काटे। कब मिलेगा औरतों को मर्दों के बराबरी का दर्जा। और रात को बाहर जाकर काम करने वाली हर महिला गलत काम करने ही नहीं निकलती ये बात अब समाज को हजम कर लेनी चाहिए। घर चलाना है तो काम भी करना होगा, नाईट ड्यूटी भी करनी होगी। समाज को अब ये परिवर्तन स्वीकार करना होगा, वो ज़माना गया जब औरतें चार दीवारी में कैद रहती थी आज की नारी का फ़लक विशाल है। मर्द के कँधे से कँधा मिलाकर हर क्षेत्र में परचम लहरा चुकी है तो अब सोच बदलो समाज बदलो। बिंदास और बोल्ड का मतलब बदचलन हरगिज़ नहीं होता।

 
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

Related Posts

Insan ke prakar by Jay shree birmi

September 22, 2021

 इंसान के प्रकार हर इंसान की लक्षणिकता अलग अलग होती हैं।कुछ आदतों के हिसाब से देखा जाएं तो कुछ लोग

Shradh lekh by Jay shree birmi

September 22, 2021

 श्राद्ध श्रद्धा सनातन धर्म का हार्द हैं,श्रद्धा से जहां सर जुकाया वहीं पे साक्षात्कार की भावना रहती हैं।यात्रा के समय

Hindi divas par do shabd by vijay lakshmi Pandey

September 14, 2021

 हिन्दी दिवस पर दो शब्द…!!   14/09/2021           भाषा  विशेष  के  अर्थ में –हिंदुस्तान की भाषा 

Hindi divas 14 september lekh by Mamta Kushwaha

September 13, 2021

हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर   जैसा की हम सभी जानते है हिन्दी दिवस प्रति वर्ष १४ सितम्बर को मनाया जाता हैं

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Leave a Comment