Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, sneha Singh

अपने बच्चे की मोबाइल की लत के लिए कहीं आप तो जिम्मेदार नहीं

अपने बच्चे की मोबाइल की लत के लिए कहीं आप तो जिम्मेदार नहीं child’s mobile-addiction ‘तन्वी बेटा शरारत मत करो।’ …


अपने बच्चे की मोबाइल की लत के लिए कहीं आप तो जिम्मेदार नहीं

child's mobile-addiction
child’s mobile-addiction

‘तन्वी बेटा शरारत मत करो।’ दिव्या ने चिल्ला कर चार साल की बेटी से कहा। तन्वी घर में इधर से उधर दौड़भाग कर रही थी और बारबार हेलोहेलो बुला रही थी। दिव्या अपने काम में व्यस्त थी। तन्वी दो बार रसोई में आ कर कह गई कि ‘मम्मा चलो थोड़ी देर मेरे साथ खेलो, मुझे गार्डन ले चलो।’ तन्वी के कहने पर दिव्या का मन तो हुआ, पर रसोई का काम अभी बाकी था। अब वह रसोई का काम छोड़ कर बेटी को घुमाने ले जाती तो स्वाभाविक है कि सभी खाए बगैर ही रह जाते। इसीलिए तन्वी शरारत कर रही थी। बेटी शरारत न करे, इसके लिए दिव्या ने उसे मोबाइल थमा दिया। दस सेकेंड पहले घर में जो शोरशराबा कर रही थी, हैलो कह रही थी, वह एकदम शांत हो गई। तन्वी एकदम चुप हो कर सोफा पर लेटे-लेटे मोबाइल देखने लगी। ऐसा अक्सर बार होने लगा। तन्वी शरारत करती, कहीं बाहर चलने की जिद करती अथवा कहीं बाहर जाने पर शरारत करती तो उसे मोबाइल दे दिया जाता। इस वजह से धीरे-धीरे तन्वी की मोबाइल की लत पड़ गई। अब वह जानबूझकर शरारत करने लगी, जिससे मम्मी उसे मोबाइल दे दें। हम जितना समझते हैं, आज के युग के बच्चे उससे कहीं अधिक स्मार्ट हो गए हैं। वह बातें कैसी भी करें, पर मां-बाप के विहैवियर को परखते हैं। जिस तरह कोई बच्चा शरारत करने के बाद मां-बाप की डांट न सुनने पड़े, इसलिए रोने लगता है अथवा बिना वजह दुलराने लगता है, जिससे मम्मी या पापा पिघल कर उन पर खीझें न। एकदम छोटी उम्र में ही बच्चे समझने लगते हैं कि अगर वह ऐसा करेंगे तो मम्मी-पापा हंसने लगेंगे और उन्हें डांटेंगे नहीं। 

child's mobile-addiction
child’s mobile-addiction

खैर, दूसरी ओर आरव का अलग ही मामला था। आरव के पैरेंट्स अक्सर रात को बेडरूम में मोबाइल ले कर उसमें कुछ देखते रहते थे। तब आरव अकेला खेलने के बजाय मम्मी-पापा को अटेंशन ग्रेब करने के लिए कुछ न कुछ ऐसा नखरा करता, जिससे वे मोबाइल एक ओर रख कर उसे अटेंशन दें। अगर रात को उसके मम्मी या पापा फोन पर किसी से बात कर रहे होते तो आरव जोरजोर से गाना गाने लगता, चिल्लाने लगता अथवा शरारत करने लगता। पूरे दिन मम्मी-पापा साथ न हों और रात को मिलें तो उस पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल पर सर्फिंग में लग जाते तो आरव बवाल कर देता। पूरे दिन मां-बाप से अलग रह कर रात को तो अपने पैरेंट्स का साथ चाहिए ही, इसमें कुछ गलत भी नहीं है। आरव अटेंशन के लिए ऐसा कर रहा है, इसकी जानकरी होते ही उसके पैरेंट्स ने अपने बेडरूम को नो सोशल मीडिया और नो मोबाइल जोन बना दिया।आप को देख कर ही बच्चे सीखते हैं

अभी जल्दी ही प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने परीक्षा की चर्चा पर एक बात कही थी कि ‘बच्चों के लिए घर में एक नो गैजेट जोन बनाओ। अब बात यह है कि नो मोबाइल जोन या नो गैजेट जोन यह तो ठीक है, क्योंकि घर के हर कोने में गैजेट नहीं होता। पर हमारी आदतें घर के कोने कोने को गैजेट फ्रेंडली बनाती हैं। हम सभी काम को छोड़ कर मोबाइल सर्फिंग की आदत पड़ गई है। अक्सर हम काम को छोड़ कर या काम खत्म होते ही सर्फिंग करने बैठ जाते हैं। युवकों को जिस तरह पान मसाले या सिगरेट की लत लगती है, अब उसी तरह मोबाइल की लत लग चुकी है। भले ही कोई चीज अपने काम की न हो, हम उसमें अपना समय बरबाद करते रहते हैं। हम सभी को ऐसा करते देख हमारे बच्चे भी वह सब सीखते हैं। मां-बाप को मोबाइल का उपयोग करते देख उनके अंदर भी जिज्ञासा जागती है कि इसमें ऐसा क्या है, जो मम्मी-पापा इसमें देखते रहते हैं। परिणामस्वरूप कम उम्र में ही बच्चा पैरेंट्स के हाथ से मोबाइल छीनने की कोशिश करने लगता है। अधिकतर मामलों में तो पैरेंट्स ही बच्चों को शांत कराने, खिलाने या अपना काम निपटाने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। इसी तरह धीरे-धीरे बच्चे भी मोबाइल के आदी बन जाते हैं। उनमें आधी शरारत इस तरह से तो आधी शरारत मोबाइल में देख कर डेवलप होती है।

शिकायत के पहले कारण समझो

child's mobile-addiction
child’s mobile-addiction

ज्यादातर पैरेंट्स की यह शिकायत होती है कि मेरा बच्चा मोबाइल का उपयोग बहुत ज्यादा करता है। उसका पढ़ाई में बिलकुल मन नहीं लगता। यह शिकायत करने के पहले बच्चा ऐसा क्यों करता है, इसका कारण जानें। आप इस बात का पता करें कि आप का बच्चा इसका आदी क्यों बना है। कहीं इसके पीछे आप खुद तो जिम्मेदार नहीं हैं? यह सीधा-सादा सवाल खुद से पूछें और इसका ऑनेस्ट जवाब भी खुद से ही पाएं। अपने बच्चों की मोबाइल देखने की आदत और जिद के पीछे कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार होते हैं। एक उम्र में अपने आराम के लिए बच्चों को मोबाइल देने में हम नहीं सोचते कि आगे चल कर यह चीज दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है। भले ही आप मोबाइल के अंदर बच्चों को राइम देखने के लिए देती हैं, पर यह आदत गंदी है। क्योंकि कुछ समय तक प्रेम से राइम देखने वाला बच्चा समय के साथ शाट्स और रील भी देखने लगता है। और फिर कुछ दिनों गेम खेलने लगता है। और जब तक आपकी समझ में आता है कि उसकी यह आदत उसकी पढ़ाई में समस्या पैदा कर रही है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क्योंकि अमुक उम्र के बाद बच्चों की मोबाइल की लत छुड़ाना लोहे के चने चबाने जैसा मुश्किल हो जाता है। इस प्रोसेस में पहले तो आप को बच्चे को बगावती होते देखना पड़ेगा, उसके बाद उनके कांसंट्रेशन को घायल होते देखना पड़ेगा। उनका व्यवहार भी बदल जाएगा है और इसका उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा।

मोबाइल से बच्चों को दूर रखना क्यों जरूरी है

child's mobile-addiction
child’s mobile-addiction

हम सभी बच्चों के अधिक मोबाइल के उपयोग की शिकायत तो कर लेते हैं, पर उन्हें मोबाइल से दूर कैसे रखा जाए, यह जटिल प्रश्न है। अब समझ लीजिए कि बच्चों में मोबाइल का क्रेज कम करने के लिए चार से पांच साल की उम्र से ही उन्हें इससे दूर रखना जरूरी है। अमुक उम्र में उन्हें इसकी लत लग गई तो दस साल से अधिक की उम्र के बाद उन्हें इससे दूर करने की कोशिश की गई तो वे बगावती हो सकते हैं। अगर ऐसा नहीं होने देना चाहती हैं तो बच्चे को उसकी मनपसंद किसी अन्य ऐक्टीविटी में व्यस्त रखें। उससे घर का थोड़ा काम कराएं। मात्र होमवर्क या पढ़ाई कराने के साथ उसके मनपसंद दूसरा काम कराने में उसका मन लगाने की कोशिश करें। सब से बड़ी बात आप खुद भी बच्चों के सामने मोबाइल का उपयोग करना टालें। अगर आप बच्चे के सामने मोबाइल का उपयोग नहीं करेंगी तो आप को देखकर बच्चा भी यह बात सीखेगा। अगर आप उसके सामने मोबाइल ले कर बैठेंगी तो स्वाभाविक है, वह भी वैसा ही करेगा। इसलिए जहां तक संभव हो मोबाइल से दूर ही रहें। साथ मिल कर किया गया प्रयास हमेशा सफल होता है, इसलिए साथ मिल कर प्रयास करें।

About author

Sneha Singh
स्नेहा सिंह

जेड-436ए, सेक्टर-12
नोएडा-201301 (उ.प्र.)


Related Posts

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news

July 21, 2021

 Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news  इस आर्टिकल मे हम जानेंगे विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़ी खबरों के

umra aur zindagi ka fark by bhavnani gondiya

July 18, 2021

उम्र और जिंदगी का फर्क – जो अपनों के साथ बीती वो जिंदगी, जो अपनों के बिना बीती वो उम्र

mata pita aur bujurgo ki seva by bhavnani gondiya

July 18, 2021

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं – एड किशन भावनानी गोंदिया  वैश्विक रूप से

Leave a Comment