Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Gurudeen Verma, poem

अधखिली यह कली | adhkhuli yah kali

अधखिली यह कली अधखिली यह कली , जो खिलती कभी ।तोड़ डाला इसे , जालिमों ने अभी ।।यह तो मिटने …


अधखिली यह कली

अधखिली यह कली , जो खिलती कभी ।
तोड़ डाला इसे , जालिमों ने अभी ।।
यह तो मिटने चली , जो महकती कभी ।
अधखिली यह कली ————————-।।

यह डोली यहाँ जिसकी , सजने लगी है ।
यह शहनाई यहाँ जो , बजने लगी है ।।
अभी तो है बचपन, उम्र खेलने की ।
बन गई है दुल्हन ,मेहंदी इसके लगी है ।।
दे रहे हैं विदाई , इसको सभी ।
मिट गए इसके अरमां , आज सभी ।।
अधखिली यह कली ————————-।।

यह किसको सुनाये , कहानी अपनी ।
बैठी रहती है खामोश , गुमशुम बनी ।।
इसके सपनों से मतलब , किसी को नहीं ।
यह तो व्यापार की एक ,वस्तु बनी ।।
लगी है नजर इसके , हुस्न पर ।
कर रहे हैं इसी का , सौदा सभी ।।
अधखिली यह कली ————————–।।

नहीं इसका नसीब , हक जताये अपना ।
आसमां को उड़े , तोड़ पहरा अपना ।।
इसके दुश्मन नहीं और , अपने ही है ।
अब बताये किसे यह , दर्द अपना ।।
यह बनकर शमां , करती रोशनी ।
मगर इसको तो , बुझा दिया अभी ।।
अधखिली यह कली ——————————।।

About author 

Gurudeen verma
शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


Related Posts

हार कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

हार! बेहतर होने का अनुभव देती हैं,यह तो सीरीफ एक परिस्थिति है,सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती है,कुछ देर की

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

Leave a Comment