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अतिथि देवो भव

अतिथि देवो भव हर देश के लिए पर्यटन एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की कुंजी है राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन …


अतिथि देवो भव

अतिथि देवो भव
हर देश के लिए पर्यटन एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की कुंजी है

राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन के माध्यम से एक स्वस्थ पर्यटन पारिस्थितिक तंत्र की स्थापना होगी – हितकारीयों की आर्थिक समृद्धि तेजी से होगी – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया 

 वैश्विक स्तरपर कोविड महामारी के चलते जबरदस्त प्रभावित क्षेत्रों में से एक पर्यटन उद्योग की भी शुमार थी या यूं कहें कि सबसे अधिक मार इस उद्योग द्वारा झेली गई और अभी तक उबर नहीं पाए हैं, क्योंकि कर्फ्यू और बंद के चलते करीब करीब दो वर्ष होते आ रहे हैं पर्यटन उद्योग के जीरो के चलते अब सामर्थयता की और धीरे-धीरे कदम बढ़ रहे हैं। हर देश के लिए पर्यटन एक सामाजिकसांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की कुंजी है जिसके आधार पर देश विदेश में एक-दूसरे को जानने सामाजिक सद्भाव रोजगार और अर्थव्यवस्था को सकारात्मक गति मिलती है। इसलिए भारत में 19 अप्रैल 2022 को भारतीय राजपत्र में राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन का की अधिसूचना जारी की और भारतीय संस्कृति, पर्यटन विरासत, अतिथि देवो भव के साथ अर्थव्यवस्था चक्र में महत्वपूर्ण योगदान,पर्यटन संबंधी रूपरेखा जारी की। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सहयोग से आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से पर्यटन पर चर्चा करेंगे

साथियों बात अगर हम पर्यटन की करें तो,पर्यटन मनुष्य की सबसे आदिम प्रवृत्ति है। अपने घर, परिवेश, समाज से बाहर जाकर दूसरे मानवीय वातावरणों के बारे में जानने की जिज्ञासा रखना ही पर्यटन का मूल है और हमारे इतिहास का निर्माण जिन अकल्पनीय खोजों से हुआ है उनमें से ज़्यादातर, जैसे नए देशों-द्वीपों-महाद्वीपों का खोजा जाना और उनके मध्य संस्कृति और व्यापार के परस्पर लेन-देन, पर्यटन के बिना संभव ही नहीं थीं। स्पेन के मैड्रिड में स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एक महत्वपूर्ण संस्था विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) दुनियाभर में होने वाले पर्यटन के मामलों की निगरानी करती है और उसके लिए मानक और दिशानिर्देश तय करती है। उसके चार्टर में पर्यटन की यह परिभाषा लिखी हुई है, पर्यटन एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत लोगों द्वारा व्यक्तिगत अथवा व्यावसायिक कारणों से अपने रोज़मर्रा परिवेश के बाहर दूसरे देशों अथवा स्थानों में आवागमन किया जाता है, इन लोगों को पर्यटक कहा जाता है और पर्यटन का सरोकार उनकी गतिविधियों से है, जिनमें से कुछ के भीतर पर्यटन संबंधी व्यय शामिल होता है। ट्रैवल और टूरिज्म में करियर के कुछ शीर्ष अवसर ट्रैवल एजेंट, होटल मैनेजर, एसपीए मैनेजर, टूर ऑपरेटर, इवेंट ऑर्गनाइज़र, टूर गाइड, एग्जीक्यूटिव शेफ, पीआर मैनेजर आदि हैं।

साथियों बात अगर हम पर्यटन की बदलती परिभाषा की करें तो, इस परिभाषा को ग़ौर से पढ़ें तो पर्यटन के पहले दो सरोकार मनुष्य सभ्यता के दो सबसे बड़े अवयवों, समाज और संस्कृति हैं, अर्थव्यवस्था का नंबर इन दोनों के बाद आता है, पिछले पचास वर्षों में अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर जिस तेज़ी से पर्यटन की प्रवृत्ति बढ़ी है, उसके परिप्रेक्ष्य में उसकी आधुनिक अवधारणा में अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे उसका सबसे पहला सरोकार बनती चली गयी है। यह एक बड़ी विडम्बना है जिसके चलते सामाजिकता और संस्कृति को पार्श्व धकेल कर संसार की सबसे सुन्दर जगहों और समाजों को आर्थिक लाभ हासिल करने की वस्तु भर बना दिया गया है।
साथियों बात अगर हम पर्यटन के प्रकारों की करें तो आदि अनादि काल से मनीषियों की विचारधारा वैचारिकसोच अलग-अलग रही है इसलिए अनेक क्षेत्रों सहितपर्यटन में भी हर वर्ग कुछ अलग देखना घूमना चाहता है इसलिए हम अनेक प्रकारों में विभाजित कर सकते हैं

  1. मनोरंजनात्मक पर्यटन,प्राय मनोरंजन गतिविधियों के उद्देश्यसे किया जाता है। अधिकांश पर्यटन माहौल में परिवर्तन एवं आराम के लिए किया जाता है, यही कारण है कि पैकेज टूर अधिक लोकप्रिय हो गए हैं।
  2. पर्यावरणीय पर्यटन, धनी और समृद्धशाली पर्यटक ऐसे सुदूरवर्ती स्थानों की यात्रा को अधिक प्राथमिकता देते हैं, जहां उन्हें साँस लेने के लिए प्रदूषण मुक्त वायु प्राप्त हो
  3. ऐतिहासिक पर्यटन, पर्यटक यह जानने में रूचि रखते हैं कि हमारे पूर्वज किस प्रकार किसी विशेष क्षेत्र में रहते थे एवं उसे प्रशासित करते थे। अतः वे विरासत स्थलों, मंदिरों, चर्चा, संग्रहालयों, किलों आदि की यात्रा करते हैं।
  4. विरासत विशेष पर्यटन यह उन लोगों के पर्यटन को संदर्भित करता है जो अपने मूल से जुड़ने और पारिवारिक दायित्वों को पूरा करने के लिए दूरस्थ स्थानों की यात्रा करते हैं। विवाह और मृत्यु के समय लोग अपने पैतृक स्थानों पर एक साथ एकत्रित होते हैं। ऐसे व्यक्ति जो अपने शेष जीवन के लिए विदेश में बसे होते हैं जब अपने जन्म स्थान की यात्रा करते हैं तो वे ऐसे पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
  5. सांस्कृतिक पर्यटन – कुछ लोग यह जानने में रूचि रखते हैं कि अन्य लोग यासमुदाय कैसे रहते हैं, कैसे जीवन व्यतीत करते हैं और किस प्रकार समृद्ध होते हैं; उनकी संस्कृति और कला एवं संगीत हमारी संस्कृति से किस प्रकार भिन्न हैं। इसलिए वे ज्ञान प्राप्त करने, संस्कृति से परिचित होने एवं संस्कृति को बेहतर तरीके से समझने के लिए यात्रा करते हैं।
  6. साहसिक पर्यटन-युवाओं के मध्य साहसिक यात्रा करने की प्रवृत्ति होती । है। वे ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, रिवर राफ्टिग इत्यादि के लिए जाते हैं। वे कैम्प फायर का आयोजन करते हैं और खुले आसमान के नीचे रहते हैं। यह पर्यटन मजबूत इच्छाशक्ति वाले लोगों के लिए है। जो तनाव सहन कर सकते हैं।
  7. स्वास्थ्य पर्यटन- हाल के वर्षों में, स्वास्थ्य पर्यटन अत्यधिक लोकप्रिय हुआ है। लोग प्राकृतिक देख-भाल केंद्रों और अस्पतालों में जाते हैं जहां उनका उपचार विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। उपचार हेतु अनेक विदेशियों द्वारा भारत की यात्रा की जाती है क्योंकि उनके देश में इस प्रकार की सेवाएं काफी महंगी होती हैं।
  8. धार्मिक पर्यटन- भारत, बहु-धार्मिक संरचना वाली जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ लोगों को धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने और धार्मिक महत्व के स्थानों की यात्रा करने में सक्षम बनाने हेतु विभिन्न पर्यटन पैकेज आयोजित किए जाते हैं। जैसे- चारधाम यात्रा।
  9. संगीत पर्यटन – यह आनंददायक पर्यटन का भाग हो सकता है क्योंकि इसमें लोगों के गाने, संगीत सुनने तथा उसका आनंद लेने के क्षण शामिल होते हैं।(10)ग्रामीण पर्यटन – इसमें विभिन्न ग्रामीण गंतव्य स्थलों को लोकप्रिय बनाने के | लिए पर्यटन करना और यात्रा की व्यवस्था करना सम्मिलित है।
  10. ग्रामीण पर्यटन – इसमें विभिन्न ग्रामीण गंतव्य स्थलों को लोकप्रिय बनाने के | लिए पर्यटन करना और यात्रा की व्यवस्था करना सम्मिलित है।
  11. वन्यजीव पर्यटन-यह पर्यावरण एवं जंतु अनुकूल पर्यटन हो सकता है। वन्य जीव पर्यटन से तात्पर्य जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने से है।

साथियों बात अगर हम पर्यटन को बढ़ावा देने पर पर्यावरणीय चिंता की ओर करें तो प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण की गुणवत्ता पर्यटन हेतु आवश्यक है। पर्यावरण के साथ पर्यटन का जटिल संबंध है। इसमें विभिन्न गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो पर्यावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं।पर्यटन के विकास कानकारात्मक प्रभाव धीरे धीरे उन पर्यावरणीय संसाधनों को नष्ट कर सकता है जिस पर यह निर्भर होता है।पर्यटन नकेवल जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है, बल्कि इससे पूर्णतः प्रभावित भी होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाएं तूफान और गंभीर मौसमी घटनाओं की आवृत्तियों में वृद्धि हो सकती है, जो प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन पर विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। पर्यटन के कुछ अन्य प्रभावों में सूखा, रोग, हीट बेब्स, तीव्र बाढ़ (उदाहरण: उत्तराखंड बाढ़), भूस्खलन, नदियों और महासागरों में प्लास्टिक के कचरों में वृद्धि आदि शामिल हैं।
साथियों बात अगर हम भारत में पर्यटन की करें तो हम मिशन आत्मनिर्भर भारत पर काम कर रहे हैं जिसमें हर नागरिक को इस मिशन रूपी यज्ञ में सहभागीदारी रूपी आहुति देकर कर्तव्य परायणता दिखानी होगी यानें हमें भारतीय पर्यटन उद्योग को प्राथमिकता से अपनाना होगा छुट्टियों में या त्योहारों में हमें संकल्प लेना होगा कि लोकल फॉर वोकल के रास्ते पर चलना है याने पर्यटन खुद भी भारत में करना है और बाहरी लोगों को भी यहां आने के लिए प्रोत्साहित आकर्षित करना है जिससे हमारा यह उद्योग मजबूत होगा तो अर्थव्यवस्था के भी अतिरिक्त द्वार खुलेंगे वैसे भी हमारी संस्कृति रही है,भारत में, प्रत्येक पर्यटक को अतिथि देवो भव भगवान के रूप में माना जाता है, इसी तरह जब हम भारतीय दूसरे देशों की यात्रा करते हैं तो हम अपने साथ अपनी भारतीय संस्कृति के मूल्यों को लेकर जाते हैं। अतुल्य भारत की सुंदरता को देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं ।भारत एक विशाल विविध स्थलाकृति है जो हिमालय पर्वत से शुरू होकर हिंद महासागर के समुद्र तट तक सभी ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासतों को कवर करती है जो एक बार भारत आने के लिए दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। वर्ष 2022 की थीम की करें तो यह पर्यटन के लिए पुनर्विचार है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व पर्यटन दिवस 27 सितंबर 2022 को मनाया गया अतिथि देवो भव हर देश के लिए पर्यटन एक सामाजिक सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की कुंजी है राष्ट्रीय डिजिटल पर्यटन मिशन के माध्यम से एक स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की स्थापना होगी हितधारियों की आर्थिक समृद्धि तेजी से होगी

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Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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