Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Ajay_prasad, poem

अजय प्रसाद की रचनाएं

अजय प्रसाद की रचनाएं  हमसे हमारे ख्वाब न छीन काँटों भरी गुलाब न छीन ।जिंदा तो हूँ गफलत में सहीयादों …


अजय प्रसाद की रचनाएं 

अजय प्रसाद की रचनाएं
हमसे हमारे ख्वाब न छीन

काँटों भरी गुलाब न छीन ।
जिंदा तो हूँ गफलत में सही
यादों की ये सैलाब न छीन ।
बेहद सुकून से रहते हैं यहाँ
सुखे फूलों से किताब न छीन ।
कुछ तो रहम कर ए मेरे खुदा
मेरे हिस्से की अज़ाब न छीन ।
कहने दे मुझे नाकाम आशिक़
रकीबों से मेरा खिताब न छीन ।
हक़ है उन्हें भी बात रखने का
मजलूमों से इंकलाब न छीन ।
नये दौर मे तरक्की है जाएज़
मगर बच्चों से आदाब न छीन ।
जिंदा रख अजय अपने को
खुद से दिले बेताब न छीन
– अजय प्रसाद

उसे अपनी गल्तियों का एहसास तो है
उसकी रहनुमाई में कुछ खास तो है ।
उठाता है कदम तो बेशक़ एहतियात से
मगर खमियाजा भुगतना भी रास तो है।
लाखों लोगों के दुआओं का असर हुआ
आजकल वो अपनो के आस-पास तो है।
डूबते सूरज से लेके सबक है रोज़ सोता
उसे वक्त के कायदे से होशोहवास तो है।
लाख इलज़ाम लगाते रहें आप उस पर
उसकी ईमानदारी पे सबको विश्वास तो है
मिल रहा है मुस्कुराकर ये अलग बात है
मगर अंदर अंदर वो बेहद उदास तो है।
-अजय प्रसाद

मेढकी को भी अब जुकाम हो रहा है
सब कुछ सलीके से निलाम हो रहा है ।
देखिए किस कदर खुश है खलनायक
मशहूर होने के लिए बदनाम हो रहा है।
आप सोंचतें रहें लोग क्या कहेंगे,मगर
हौंसलाअफजाई का इंतजाम हो रहा है।
जो जिस ओहदे पे है सियासत में यारों
हैसीयत मुताबिक दुआ-सलाम हो रहा है।
आप अजय की फ़िकर न करें जनाब
रोज़ उसका भी काम तमाम हो रहा है ।
-अजय प्रसाद

फूल और खार के बीच
जीत और हार के बीच ।
रिश्ता होता गहरा यारों
घृणा और प्यार के बीच ।
आजकल है मेल कहाँ
घर औ परिवार के बीच।
कौन महफ़ूज़ रहता है
गर्दनो-तलवार के बीच ।
अच्छा है खुद छोड़ गए
नाव मझधार के बीच ।
-अजय प्रसाद

अरे!ये मुहँ और मसूर की दाल
गरीब है,महंगे शौक,मत पाल ।
मत पका यहाँ खयाली पुलाओ
जो है मिला उस को तो संभाल।
ख्वाब देख मगर,औकात में रह
खाली पीली खुद को न खंगाल ।
है खाली जेब खुद्दारि ! जैसे कि
गीदड़ ने पहना हो शेर की खाल।
मुसीबत मौके का फायदा उठाती है
अजय कुछ तो रख वक्त का ख्याल।
-अजय प्रसाद


Related Posts

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav

June 7, 2021

 भावनाएँ बारिश की ****************ये भी अजीब सी पहली हैकि बारिश की भावनाओं को तोपढ़ लेना बहुत मुश्किल नहींसमझ में भी

kavita kya hua by kundan kumar

June 7, 2021

  क्या हुआ थम चुकी ये वादियां रूक गई ये अबादियां उठ रही चिंगारियां क्या हुआ ……….? डरे-डरे हैं लोग

Gazal-azad gazal by ajay prasad

June 6, 2021

आज़ाद गज़ल मुझें साहित्यकार समझने की आप भूल न करें उबड़-खाबड़,कांटेदार रचनाओं को फूल न कहें। मेरी रचनाएँ बनावट और

kavita-tufaan by anita sharma

June 6, 2021

  “तूफान” कोरोना का संकट कम था क्या?जो,प्राकृत आपदा टूट पड़ी । कहीं घरों में पानी घुसा,कहीं आँधी से वृक्ष

kavita- sab badal gya by jitendra kabir

June 6, 2021

सब बदल गया है आजादी के परवानों ने कुर्बान किया खुद को जिनकी खातिर, उन आदर्शों के लिए देश के

kavita sangharsh by mosam khan alwar

June 6, 2021

संघर्ष संघर्ष है जिसके जीवन में उसे जीवन का सार हैनित जीवन में करते हम संघर्ष जीवन का आधार हैउठ

Leave a Comment