Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

अंतिम संदेश।(Last message)

अंतिम संदेश। जिंदगी का क्या भरोसा,कब हमारा आखरी पल हो,कभी खुद को तो कभी लोगों को कोसा,पर कौन जाने कि …


अंतिम संदेश।

अंतिम संदेश।(Last message)

जिंदगी का क्या भरोसा,
कब हमारा आखरी पल हो,
कभी खुद को तो कभी लोगों को कोसा,
पर कौन जाने कि जीवन में कल हो।

आज है, इसी वक्त है,
जो अभी है वही सच है,
कभी खुद के साथ तो कभी लोगों से सख्त है,
किसी ना किसी चीज का हमेशा लालच है।

ऐसा ना हो कि आखिरी क्षण ना मिले,
धन्यवाद दिए बिना ही चले जाएं,
सख्क्ति में मुस्कान के फूल ना खिले,
आभार प्रकट करें बिना ही मर जाए।

हम तुम्हें तुम हमें अलविदा कहो,
इससे पहले एक बात सुनाएं,
जीवन में तुम खुश रहो,
यही है हमारी आशा और दुआएं।

जाने से पहले यह कहना चाहे,
किसी से गिला शिकवा नहीं
उस आखिरी वक्त में मौका ना पाए,
इसलिए वक्त रहते यह बात है कहीं।

माता पिता और शिक्षकों को,
दे कोटि-कोटि प्रेम और आभार,
मित्र जनों और सभी को,
भी जरूर दे ढेर सारा प्यार।

इंसानियत के अनगिनत करम हो,
संभावित हर सपने साकार हो,
आखिरी वक्त पर भी हम प्रसन्न हो,
हमारे सफल जीवन की जय जय कार हो।

तो आज से ही करे आखरी वक्त की तैयारी,
जियो रोज ऐसे, जैसे हो आखरी दिन,
इंसानियत हो, जज्बा हो और हो दिलदारी,
पता नहीं कब जाए यह अनमोल जीवन छीन।।

About author

Dr madhvi borse
डॉ. माध्वी बोरसे।
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)

Related Posts

शोषण- चन्दानीता रावत

January 15, 2022

शोषण जागो मानव के मन, जागोशोषण के विरूद्ध चुपी तोडो़समाज के काले विचारों सेरिश्ता तोडो़, दो जवाब मुड़ कर इनरुढ़िवादी

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 13, 2022

जीवन है तो जिए जाना बहुत तकलीफ़ देता है अपने किसी करीबी काइस दुनिया से असमय चले जाना, किसी हंसते

मान हैं मुझे तुम पर-जयश्री बिरमी

January 13, 2022

मान हैं मुझे तुम पर आन भी हैं तू मान भी हैं तूहिंदी तू हिंदुस्तान की जान हैं तूतेरी मीठे

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है?-जितेन्द्र ‘कबीर’

January 13, 2022

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है? हर बार सामने आती हैंजांच एजेंसियों कीदेरी और लापरवाही की खबरेंबलात्कार,हत्या जैसे संगीन मामलों

परछाईं- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

परछाईं वक्त कितना भी बदल जायेहम कितने भी आधुनिक हो जायें, कितने भी गरीब या अमीर होंराजा या रंक हों

आज की द्रौपदी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

आज की द्रौपदी एक तो द्रौपदी थी तबअनेक है आज भीक्यों बचा न पाए आज के कृष्णजब बिलखती हैं वहआज

Leave a Comment