Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

laghukatha, story

Amisha laghukatha by Anita Sharma

 अमीषा अमीषा आज बहुत खुश है, हो भी क्यों न उसके बेटे की सगाई जो हुई है।सुन्दर सी पढ़ी लिखी …


 अमीषा

Amisha laghukatha by Anita Sharma

अमीषा आज बहुत खुश है, हो भी क्यों न उसके बेटे की सगाई जो हुई है।सुन्दर सी पढ़ी लिखी डाक्टर बहु जो आ रही है।उसने अपने मन में निश्चय कर लिया है वह अपनी बहु को एक अच्छा माहौल देगी।फालतू की अपेक्षाए नहीं रखेगी। हाँ एक स्वस्थ्य माहौल देगी,कोई बंदिश नहीं।अमीषा के नवजीवन में जो कमियाँ थी वो सब बहु के जीवन में भर देगी।

अचानक अमिषा अतीत में चली गई।उसके पिता एक ईमानदार ऑफीसर थे पर ईमानदारी की सजा हाँ आर्थिक संकट के रूप में मिलती है।पर सभी भाई बहनों ने खूब अच्छा जीवन जिया खूब पढ़ाई की।

सभी लड़कियों की तरह अमिषा की भी शादी तय हुई।कहा गया हमें कुछ नहीं चाहिए पर….मन में था ।

अमिषा की शादी का दिन आया कितने अरमानो के साथ स्टेज पर जयमाला के लिए गयी पर वहाँ नन्दो को खटकता रहा..”.बाबूजी देख रहे इन्हें अंदर भेजो”

अमिषा को लगा वह उठकर चली जाये पर …लोग क्या कहेंगे।मण्डप में हर मिनट पर चाय और छीटाकशी का दौर चलता रहा।चढ़ाव के समय हमारे यहाँ फेरो के बाद चढ़ाव चढ़ता है।ऐसा ही हुआ भी।बिदाई पर बिना ऐठ दिखाये कैसे काम चलता सो वह भी हुआ।बिदा होकर ससुराल आई तो सास का मुँह बना था मुँह चायने में यही स्वागत मिला।अगले दिन फरमान सुनाया गया सारा जेवर छोटी बेटी का है।अमीषा ने तुरन्त दे दिया।

बहुत पुराने ख्यालात का परिवार पर्दा प्रथा।

गाली गलौच और मारपीट का माहौल।अमीषा इसी बीच गर्भवती हो गयी।उसने मन में विचार किया यहाँ बच्चे को जन्म नहीं देगी उसने अपने पति से कहा और वे मान गये।मायके में पुत्र जन्म हुआ नाम पति ने रखा “सिद्धांत”।चूंकि मायके में हुआ था तो तानों की बौछार–मायके से लाई।कोई गोद में न लेता।खैर दस महीने अकेले परवरिश की और फिर मायके आ गयी।उसका मन ऐसे माहौल में घबराता था।एक घटना के बाद स्वयं अमीषा के पिताजी उसे ले गये थे।

मम्मी….अचानक अमीषा की तंद्रा भंग हुई सामने बेटा खड़ा था जो अभी अभी आया था।जनरल सर्जरी के बाद फैलोशिप कर रहा है।

अमीषा अतीत से वर्तमान में लौटी प्रसन्नता से बेटे की ओर देखा और उसे संतुष्टि मिली कि बच्चों को पालने में सफल रही एक अच्छा इन्सान बनाया।अमीषा लग गयी अपनी बहु के लिए चढ़ाव का सामान खरीदने उसके स्वागत में।

उसने एक निश्चिय फिर दोहराया बेटी की तरह रखेगी।।

—-अनिता शर्मा झाँसी
——मौलिक रचना


Related Posts

बालकथा-तारामंडल का खोया हुआ नक्शा

बालकथा-तारामंडल का खोया हुआ नक्शा

January 29, 2026

दस साल का मयंक हर रात छत पर बैठकर तारों को देखा करता और कल्पनाएं बुनता रहता। उसे लगता था

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

गुड्डू और परीक्षा का डर – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

गुड्डू एक चंचल और होशियार लड़का था। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता था और हमेशा स्कूल में सबसे आगे रहता

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

जादुई झील और परियों का रहस्य – बच्चों के लिए प्रेरक कहानी

January 1, 2026

बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर और शांत गाँव था—देवगिरी इस गाँव के पास एक नीली-सी झील थी,

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

कहानी: दुपट्टे की गाँठ

July 28, 2025

कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी

प्रियंका सौरभ की लघुकथाएं

प्रियंका सौरभ की लघुकथाएं

July 25, 2025

बर्थडे केक नीलिमा का जन्मदिन था। सबने बधाइयाँ दीं — पति ने केक मंगाया, बेटे ने गाना गाया। लेकिन नीलिमा

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

कहानी-कहाँ लौटती हैं स्त्रियाँ

July 24, 2025

कामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,

Next

Leave a Comment