मैं शापित हूँ
घुट घुट कर मर जाने को
मैं शापित हूँ
हर बार जलाए जाने को
नहीं कह पाती हूँ मैं दर्द अपना
मैं शापित हूँ
चुपचाप सह जाने को
पीड़ा देखती हूँ उनकी
मैं भी रो पड़ती हूँ
हाँ मैं शापित हूँ
कुछ ना कह पाने को
होते हैं कुछ रिश्ते ऐसे जैसे
पैरों में बिवाइयाँ या हो मोटे छाले
पर हम शापित हैं
उस चुभन को सह जाने को
हर बार मुस्कुराने को
हाँ हम सब शापित हैं
स्त्री हो जाने को





